Business News: तम्बाकू इंसानी शरीर के लिए बेहद जानलेवा है और यह करीब 15 तरह के कैंसर की मुख्य वजह बनता है। अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक तम्बाकू सिर्फ कैंसर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दिल और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ा देता है।
तम्बाकू चबाने से लेकर सिगरेट, हुक्का और सिगार के जरिए शरीर को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद दुनिया के कुछ चुनिंदा देश तम्बाकू की खेती करके जमकर कमाई कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर चीन तम्बाकू उगाने में पहले नंबर पर है, जबकि भारत में भी इसका बड़ा कारोबार होता है।
वर्ल्ड नो-टोबैको डे के मौके पर जारी सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में तम्बाकू की खेती से किसानों की आय दोगुनी हुई है। साल 2019-20 में जो तम्बाकू 124 रुपये प्रति किलो बिकता था, वह वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 279.54 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
भारत सरकार का दावा है कि तंबाकू बोर्ड लगातार इसकी पैदावार और एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रहा है। देश के कुल उत्पादन में अकेले गुजरात राज्य की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इसके बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आते हैं।
भारत के प्रमुख उत्पादक राज्य और उनकी हिस्सेदारी
देश में सबसे ज्यादा तम्बाकू उगाने में गुजरात शीर्ष पर है, लेकिन कई अन्य राज्यों में भी इसकी बंपर पैदावार होती है। विभिन्न राज्यों में तंबाकू के उत्पादन और उनके प्रमुख उत्पादक जिलों की स्थिति को हम नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं। रैंक राज्य तंबाकू उत्पादन का हिस्सा (%) प्रमुख तंबाकू उत्पादक जिले 1 गुजरात 41% सौराष्ट्र, उत्तरी गुजरात 2 आंध्र प्रदेश 22% प्रकाशम, गुंटूर, कृष्णा 3 कर्नाटक 16% शिवमोग्गा, चित्रदुर्ग, तुमकुर 4 तेलंगाना 11% आदिलाबाद, करीमनगर, वारंगल 5 उत्तर प्रदेश 5% झांसी, महोबा, बांदा 6 राजस्थान 4% कोटा, बूंदी, बारां 7 पश्चिम बंगाल 3% कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग 8 तमिलनाडु 2% डिंडीगुल, तिरुचिरापल्ली, मदुरै 9 मध्य प्रदेश 1% सीहोरे, देवास, राजगढ़ 10 महाराष्ट्र 1% हिंगोली, नांदेड़, लातूर
आखिर गुजरात कैसे बना देश में तम्बाकू का सबसे बड़ा गढ़?
तम्बाकू की पैदावार में गुजरात के नंबर-वन बनने के पीछे अनोखी भौगोलिक और तकनीकी वजहें हैं। गुजरात के आणंद, खेड़ा और वडोदरा जिलों की मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम है। यहां की काली कपास वाली मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जो पौधों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।
इसके अलावा उत्तरी गुजरात की रेतीली मिट्टी जड़ों को तेजी से फैलने में मदद करती है। मौसम के लिहाज से भी गुजरात को वरदान मिला हुआ है। अक्टूबर से मार्च के दौरान यहां न ज्यादा बारिश होती है और न ही यूपी-बिहार जैसी हाड़ कंपाने वाली ठंड होती है, जिससे पत्तियां सुरक्षित रहती हैं।
गुजरात मुख्य रूप से ‘निकोटियाना टेबेकम’ किस्म उगाता है, जो देश के बीड़ी उद्योग की मुख्य रीढ़ है। यहां के किसानों के पास पीढ़ी दर पीढ़ी खेती करने का हुनर है। साथ ही राज्य में ग्रेडिंग, क्यूरिंग और पैकेजिंग के लिए दशकों पुराना मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और मंडियां उपलब्ध हैं।
दुनिया के इन रईस देशों को तम्बाकू बेचता है भारत
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि महाशक्ति अमेरिका भारतीय तम्बाकू का सबसे बड़ा इंटरनेशनल खरीदार है। भारत के कुल तंबाकू एक्सपोर्ट का अकेले 18 फीसदी हिस्सा अमेरिका भेजा जाता है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (8.23%) और नीदरलैंड (5.16%) का नंबर आता है।
इन देशों के अलावा चीन (3.85%), सिंगापुर (3.33%), ब्रिटेन (3.00%), सऊदी अरब (2.67%), बांग्लादेश (2.55%), जर्मनी (2.27%) और इटली (2.02%) भी भारत से भारी मात्रा में तम्बाकू खरीदते हैं। भारतीय किसानों को तंबाकू बोर्ड की तरफ से एमएसपी और तकनीकी सहायता का पूरा लाभ मिलता है।
Author: Sachin Kulkarni


