S&P Global Ratings on India: वैश्विक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, S&P ने निवेश और रुपये पर जताई स्थिरता

New Delhi News: वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (S&P) ग्लोबल रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताते हुए निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। एजेंसी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते वित्तीय तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारत की स्थिति कई विशेषज्ञों की अपेक्षा से कहीं बेहतर है। एसएंडपी ने स्पष्ट किया कि भारत के पास कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बाहरी घाटे के दबाव को संभालने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता मौजूद है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ईरान संघर्ष के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

पूंजी निकासी की चिंताओं को बताया बढ़ा-चढ़ाकर

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में निदेशक यीफर्न फुआ (YeeFarn Phua) ने कहा कि भारत से पूंजी बाहर जाने की खबरें कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई हैं। फुआ के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही बिकवाली दरअसल बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने लाभ की पुनः वापसी (Profit Repatriation) है, न कि भारतीय बाजार में भरोसे की कमी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुद्ध बहिर्वाह की चिंताएं बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश में कुल निवेश प्रवाह अभी भी मजबूत बना हुआ है और आर्थिक आधार काफी ठोस हैं।

कच्चे तेल और रुपये की स्थिति पर एजेंसी का रुख

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि सीधे तौर पर व्यापार संतुलन और मुद्रा स्थिरता को प्रभावित करती है। घरेलू शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी ने रुपये पर दबाव जरूर बनाया है, लेकिन एसएंडपी का मानना है कि भारत के पास इन अस्थायी झटकों को सहने के लिए पर्याप्त ‘बफर’ मौजूद है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि चालू खाता घाटा बढ़ने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक शक्ति इसे बड़े संकट से बचाने में सक्षम है।

आर्थिक सुरक्षा के लिए सरकार के आपातकालीन कदम

भू-राजनीतिक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने हेतु कई कड़े उपायों पर विचार कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन के संयमित उपयोग की अपील की है ताकि आयात बिल को नियंत्रित किया जा सके। सरकार गैर-जरूरी वस्तुओं जैसे सोना और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध या उच्च शुल्क लगाने जैसे विकल्पों को तलाश रही है। हाल ही में सोने-चांदी पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी इसी रणनीति का हिस्सा है ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।

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