Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उच्च न्यायालय ने सरकार को एक सख्त आदेश दिया है। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और जल शक्ति विभाग में तबादले पूरी तरह ऑनलाइन होंगे। सरकार का यह फैसला राज्य के लाखों कर्मचारियों को सीधा प्रभावित करेगा। इस नई व्यवस्था से राजनीतिक सिफारिशों पर पूरी तरह से रोक लगेगी। अब कर्मचारियों को ट्रांसफर के लिए मंत्रियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
इन तीन बड़े विभागों में लागू होगा नया नियम
राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और जल शक्ति विभाग सबसे बड़े माने जाते हैं। शिक्षा विभाग में लगभग अस्सी हजार शिक्षक काम करते हैं। अन्य कर्मचारियों को मिलाकर यह संख्या एक लाख दस हजार पार कर जाती है। जल शक्ति विभाग में भी ग्यारह हजार कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में पैंतीस हजार पैरामेडिकल स्टाफ काम करता है। डॉक्टरों के तबादले निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा द्वारा किए जाते हैं।
तबादलों की पुरानी प्रक्रिया में होगा बदलाव
मौजूदा समय में तबादले के आदेश केवल वेबसाइट पर अपलोड होते हैं। लेकिन इसकी पूरी प्रक्रिया अब भी ऑफलाइन तरीके से ही चलती है। अक्सर विधायक और मंत्री अपने चहेतों का ट्रांसफर आसानी से करवाते हैं। इस व्यवस्था को बदलने के लिए सरकार ने कार्मिक विभाग से सलाह मांगी है। सरकार यह जानना चाहती है कि क्या इसके लिए नियमों में बदलाव होगा। नई व्यवस्था में किसी भी तरह का पक्षपात बिल्कुल नहीं होगा।
शिक्षा सचिव ने अधिकारियों के साथ की अहम बैठक
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने इस अहम मुद्दे पर अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर के अधिकारियों से भी लंबी चर्चा पूरी की। बैठक में तय हुआ कि इस काम के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं बनेगा। एनआईसी के पुराने सॉफ्टवेयर को ही अपडेट करके दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सभी शिक्षकों का नया डाटा फीड होगा क्योंकि कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं।
वीरभद्र सरकार के समय से चल रही है तैयारी
ऑनलाइन तबादलों की यह पूरी प्रक्रिया पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय शुरू हुई थी। उस समय पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी। बाद में जयराम ठाकुर सरकार ने भी अपनी टीम को अन्य राज्यों में भेजा था। एनआईसी ने तब अस्सी हजार शिक्षकों का पूरा डाटा अपने सॉफ्टवेयर में डाला था। महिला, विधवा और तलाकशुदा शिक्षकों के लिए विशेष छूट का नियम भी बना था।
दैनिक आवेदनों से अधिकारियों का बर्बाद होता है समय
सरकार के पास हर दिन तबादले के लिए लगभग पचास से दो सौ आवेदन आते हैं। विधायकों और मंत्रियों के सिफ़ारिशी पत्र भी भारी संख्या में दफ्तर पहुँचते हैं। फिलहाल राज्य सरकार ने सामान्य तबादलों पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। केवल विशेष परिस्थितियों में ही सरकार की तरफ से ट्रांसफर आदेश जारी होते हैं। तबादलों की फाइलों में उलझे रहने के कारण अधिकारियों का कीमती समय बर्बाद होता है।
ऑनलाइन सिस्टम से कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत
शिक्षा सचिव ने कहा है कि ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया का नया प्रारूप तेजी से तैयार हो रहा है। इसके पूरी तरह से लागू होने पर कर्मचारियों को निम्नलिखित बड़े फायदे देखने को मिलेंगे:
- ट्रांसफर की प्रक्रिया में सौ प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
- अधिकारी नई नीतियों पर ध्यान देंगे और उनका कीमती समय बचेगा।
- कर्मचारियों को दफ्तरों और मंत्रियों के चक्कर बिल्कुल नहीं काटने पड़ेंगे।
- स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और विभागीय कामकाज सुचारू रूप से चलेगा।


