Tel Aviv News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि केवल अमेरिका ही उनका इकलौता मददगार नहीं है। नेतन्याहू ने भारत की अटूट दोस्ती का विशेष हवाला दिया है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजरायल को दी थी नसीहत
दरअसल, जून के महीने में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने व्हाइट हाउस की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि पूरी दुनिया में केवल डोनाल्ड ट्रंप ही इजरायल के सच्चे हमदर्द हैं। वेंस ने इजरायली कैबिनेट को वाशिंगटन की सार्वजनिक आलोचना न करने की नसीहत दी थी।
इंटरव्यू के दौरान जब फॉक्स न्यूज की एंकर ने जेडी वेंस के इसी तीखे बयान पर इजरायली प्रधानमंत्री की राय पूछी। तब नेतन्याहू ने जवाब दिया कि वे जेडी वेंस की बहुत इज्जत करते हैं। उनके साथ रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन वे अमेरिकी उपराष्ट्रपति की हर बात से सहमत नहीं हैं।
नेतन्याहू बोले 140 करोड़ की आबादी वाला भारत हमारा सच्चा दोस्त
नेतन्याहू ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका के अलावा दुनिया में हमारे कई अन्य गहरे मित्र भी हैं। उन्होंने विशेष रूप से नई दिल्ली का नाम लेते हुए कहा कि 140 करोड़ की विशाल आबादी वाले भारत में इजरायल को अपार जनसमर्थन हासिल है।
उन्होंने आगे कहा कि फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें भारतीय नागरिकों के लगातार समर्थन भरे मैसेज मिलते हैं। नेतन्याहू ने मीडिया पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस जानबूझकर इजरायल के खिलाफ मनगढ़ंत खबरें प्रसारित कर माहौल खराब कर रहे हैं।
ग्लोबल लीडर्स पर्दे के पीछे से कर रहे हैं इजरायल की मदद
इजरायली प्रधानमंत्री ने दावा किया कि दुनिया के कई देशों के बड़े ग्लोबल लीडर्स उन्हें सीधे फोन करते हैं। वे नेता अपनी घरेलू राजनीति और पब्लिक ओपिनियन के भारी दबाव के बावजूद इजरायल की तारीफ करते हैं। वे हमारे साथ एआई और साइबर सिक्योरिटी में काम करना चाहते हैं।
नेतन्याहू ने वाशिंगटन और यरूशलम के बीच हालिया तल्खी पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना सबसे करीबी और बेहतरीन दोस्त बताया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
ईरान पीस डील और लेबनान पर हमलों से बढ़ा था तनाव
हाल ही में जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही थी, तब इजरायल लेबनान पर लगातार घातक हमले कर रहा था। ईरान ने चेतावनी दी थी कि ये हमले पूरी शांति वार्ता को आसानी से बिगाड़ सकते हैं। इससे अमेरिका नाराज था।
जी-7 समिट में डोनाल्ड ट्रंप ने भी इजरायली कार्रवाई को पूरी तरह गैर-जरूरी बताया था। ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी मदद के बिना इजरायल का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने नेतन्याहू को नसीहत देते हुए लेबनान के मामले में अधिक जिम्मेदार होने के लिए कहा था।
परमाणु हथियार के मुद्दे पर झुकेगा नहीं इजरायल
अमेरिकी दबाव और घरेलू राजनीति के बीच नेतन्याहू ने ईरान को लेकर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है। उन्होंने अपनी कैबिनेट की चिंताओं को सही ठहराते हुए एक बड़ा संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि समझौता हो या न हो, उनके रहते ईरान परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा।
दोनों देशों के बीच हुए इस हालिया आरोप-प्रत्यारोप को कूटनीतिक गलियारों में बड़ी तल्खी के रूप में देखा गया। लेकिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया कि बाहरी दुनिया में जो कड़वाहट दिखाई देती है, जमीनी हकीकत में इजरायल के संबंध कई देशों के साथ बेहद मजबूत हैं।

