Ladakh News: लद्दाख प्रशासन ने क्षेत्र की नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी और पर्यावरण की रक्षा के लिए कमर कस ली है। प्रशासन ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग, बिक्री और भंडारण पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। नए नियमों के तहत अब लेह एयरपोर्ट और बॉर्डर चेकपॉइंट्स पर पर्यटकों की औचक जांच की जाएगी।
नियम तोड़ने पर लगेगा 10,000 रुपये तक का जुर्माना
लद्दाख में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा वहां के प्रशासन द्वारा की गई है। नए सख्त नियमों का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये तक का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने पर भी 5,000 रुपये तक का जुर्माना देने का प्रावधान किया गया है।
इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए जमीनी स्तर के अधिकारियों को चालान जारी करने की शक्तियां दी गई हैं। इनमें बीडीओ, तहसीलदार और वन रक्षक शामिल हैं। नया प्रवर्तन ढांचा इन अधिकारियों को उल्लंघन का पता लगाने और तुरंत सख्त कार्रवाई करने का पूरा अधिकार देता है।
पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायों पर पड़ेगा सीधा असर
प्रशासन के अनुसार, इन जांचों का मुख्य उद्देश्य प्रतिबंधित प्लास्टिक उत्पादों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रवेश करने से रोकना है। इन नए नियमों से पर्यटकों, परिवहन संचालकों और क्षेत्र में माल ले जाने वाले व्यवसायों के प्रभावित होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
यह घोषणा पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई है। लद्दाख में हर साल भारी संख्या में पर्यटक आते हैं। प्रशासन ने लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी और खूबसूरत परिदृश्य की रक्षा के प्रयासों के तहत यह कड़ी कार्रवाई शुरू की है।
लद्दाख में क्यों बढ़ा प्लास्टिक कचरे का बड़ा संकट?
लद्दाख का ऊंचाई वाला शीत रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र प्रदूषण के प्रति बेहद संवेदनशील है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सीमित बुनियादी ढांचे और चरम जलवायु परिस्थितियों के कारण यहां प्लास्टिक कचरे का अपघटन बहुत धीमा होता है। इस वजह से प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में भारी चुनौतियां आती हैं।
लेह, नुब्रा घाटी और पैंगोंग झील जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर हर साल पर्यटकों का भारी हुजूम उमड़ता है। इससे स्थानीय अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है। यह नया नियम लद्दाख में प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार लाने के लिए बेहद मददगार साबित होगा।
Author: Rigzin Namgyal


