Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भूकंप के प्रति संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा के लिए केवल पंचायत का सर्टिफिकेट काफी नहीं है। अब बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले सॉयल टेस्टिंग और स्ट्रक्चरल डिजाइन असेसमेंट रिपोर्ट अनिवार्य होगी।
बिना सॉयल टेस्टिंग ऊंची इमारतों को मंजूरी नहीं
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की बेंच ने अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन से जुड़ी जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। डबल बेंच ने कहा कि खड़ी पहाड़ियों और डेंजर जोन में प्रस्तावित ऊंची बिल्डिंग्स को सिर्फ पंचायत के कागज पर अनुमति नहीं दे सकते। कोर्ट ने नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने कहा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट की धारा 31-ए के तहत नियमों का पालन बेहद जरूरी है। इसके अनुसार किसी भी भवन के उपयोग से पहले मिट्टी की जांच रिपोर्ट, स्ट्रक्चरल डिजाइन रिपोर्ट और स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इस सुनवाई के दौरान टीसीपी सेक्रेटरी अमरजीत सिंह और डायरेक्टर हेमिस नेगी भी कोर्ट में मौजूद रहे।
हाई कोर्ट ने सरकार की स्टेटस रिपोर्ट को नकारा
हाई कोर्ट ने सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर गहरा असंतोष जताया है। कोर्ट ने पाया कि अब तक केवल लाहौल-स्पीति की रीजनल प्लानिंग ही नोटिफाई हो सकी है। सोलन का काम अभी शुरुआती ड्राफ्ट स्टेज पर है। इसके साथ ही शिमला, कांगड़ा और कुल्लू की प्लानिंग समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरी है।
हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ने इस गंभीर मामले में कोई खास प्रोग्रेस नहीं दिखाई है। प्रशासन केवल अदालती आदेशों के बाद ही नींद से जागता है और सक्रिय होता है। हाई कोर्ट इस पूरे मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 7 जुलाई को निर्धारित तारीख पर करेगी।


