Uttar Pradesh News: नारी सशक्तीकरण पर विशेष चर्चा को लेकर उत्तर प्रदेश विधान सभा में उपजा विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नियमावली के तहत ऐसी चर्चा कराने में कोई तकनीकी बाधा नहीं है। उन्होंने बताया कि नियम-103 के अंतर्गत अध्यक्ष की सहमति से जनहित के किसी भी विषय पर प्रस्ताव लाया जा सकता है। महाना ने जोर देकर कहा कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए कोई कठोर प्रतिबंध नहीं माना जा सकता है।
संसदीय नियमों और विपक्ष की आपत्ति का जवाब
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने चर्चा पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि नियमावली के अनुसार उन विषयों पर बहस नहीं होनी चाहिए, जो सीधे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को संसद का विषय बताया था। हालांकि, अध्यक्ष ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में संविधान ने चर्चा के विषयों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान हुए पुराने उदाहरणों का भी हवाला दिया।
नारी सशक्तीकरण बनाम महिला आरक्षण का मुद्दा
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने विपक्ष के रुख पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का यह प्रस्ताव ‘नारी सशक्तीकरण’ पर केंद्रित है, न कि केवल महिला आरक्षण पर। मंत्री ने कहा कि आरक्षण भले ही केंद्र का विषय हो, लेकिन राज्य की आधी आबादी का सशक्तीकरण प्रदेश सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्ष द्वारा इतने महत्वपूर्ण विषय पर सवाल उठाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सरकार ने साफ किया कि चर्चा का उद्देश्य महिलाओं के उत्थान पर विचार साझा करना है।
चर्चा में महिला सदस्यों ने दिखाई अपनी ताकत
नारी सशक्तीकरण पर हुए इस विशेष सत्र की सबसे खास बात महिला सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। सदन में मौजूद कुल 51 महिला सदस्यों में से 16 ने अपने विचार मजबूती से रखे। गुरुवार को हुई इस विशेष चर्चा के दौरान करीब 31 प्रतिशत महिलाओं ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि अध्यक्ष सतीश महाना की अनुपस्थिति में सदन का संचालन (अधिष्ठाता के रूप में) भी मंजू शिवाच और केतकी सिंह जैसी महिला विधायकों ने ही संभाला।
लोकतंत्र में जनहित के प्रस्तावों की अहमियत
अध्यक्ष सतीश महाना ने अंत में स्पष्ट किया कि नियम-103 के तहत किसी भी प्रस्ताव की स्वीकार्यता पर उनका निर्णय अंतिम होगा। उन्होंने कहा कि सदन की सहमति और अध्यक्ष की अनुमति से समाज के विकास से जुड़े मुद्दों पर बहस करना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। विपक्ष ने भी बाद में साफ किया कि वे नारी सशक्तीकरण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि केवल प्रस्ताव की तकनीकी भाषा पर स्पष्टीकरण चाहते थे। अब इस चर्चा के बाद महिला विकास के रोडमैप पर सरकार आगे बढ़ेगी।


