सुप्रीम कोर्ट का बंगाल सरकार पर बड़ा एक्शन, जजों को बंधक बनाने पर NIA जांच के आदेश

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West Bengal News: पश्चिम बंगाल के मालदा में जजों को बंधक बनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। सर्वोच्च अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस गंभीर मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने राज्य प्रशासन को विफल करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव को बिना शर्त माफी मांगने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाने पर नाराजगी

मालदा में जजों के घेराव के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई थी। राज्य के मुख्य सचिव ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस रवैये को बेहद गैर-जिम्मेदाराना माना। मुख्य सचिव ने सफाई दी कि वह उस वक्त फ्लाइट में सफर कर रहे थे। इस पर अदालत ने कहा कि उन्हें अपना फोन नंबर साझा करना चाहिए था। अदालत ने मुख्य सचिव के वकील को बचाव करने से रोक दिया।

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एनआईए को सौंपी गई सभी एफआईआर की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया है। पीठ ने आदेश दिया कि राज्य पुलिस द्वारा दर्ज सभी एफआईआर एनआईए को सौंपी जाएं। अदालत को बताया गया कि चुनाव आयोग पहले ही एनआईए जांच की सिफारिश कर चुका है। राज्य पुलिस पर स्थानीय स्तर पर बहुत गंभीर आरोप लग रहे थे। अदालत ने कहा कि एनआईए किसी भी कारण से दर्ज एफआईआर हाथ में ले सकती है।

मालदा में न्यायिक अधिकारियों का हुआ था घेराव

मालदा जिले में एक अप्रैल को एक बहुत ही चौंकाने वाली घटना घटी थी। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का विरोध कर रहे लोगों ने भारी हंगामा किया था। इन लोगों ने सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बनाए रखा। इन अधिकारियों में तीन महिला जज भी शामिल थीं। ये सभी अधिकारी विशेष सारांश संशोधन के काम में लगे हुए थे। इस घटना ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले का लिया था स्वतः संज्ञान

इस गंभीर घटना के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। अदालत ने दो अप्रैल को इस मामले की पहली सुनवाई की थी। उस समय कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए थे। अदालत ने केंद्रीय सशस्त्र बलों की तत्काल तैनाती का अहम आदेश भी पारित किया था। सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह घेराव पूर्व नियोजित साजिश था। यह घटना राज्य मशीनरी की बहुत बड़ी नाकामी को दर्शाती है।

गिरफ्तार किए गए छब्बीस लोगों से होगी पूछताछ

पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घेराव मामले में अब तक छब्बीस लोगों को गिरफ्तार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि एनआईए इन सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ करे। अदालत ने एनआईए द्वारा पेश की गई शुरुआती स्टेटस रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में देखा। पीठ ने कहा कि अब केंद्रीय एजेंसी पूरी तरह से पुलिस से जांच ले लेगी। राज्य पुलिस अब इस संवेदनशील मामले में किसी भी तरह का कोई दखल नहीं देगी।

राज्य की नौकरशाही की कम हो रही है विश्वसनीयता

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य की नौकरशाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने मुख्य सचिव से कहा कि नौकरशाही अपनी विश्वसनीयता खो रही है। सचिवालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में राजनीतिक दखल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अदालत ने इस स्थिति को एक बहुत ही खतरनाक चलन बताया है। जजों की सुरक्षा में इस तरह की भारी लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

एनआईए को आगे की कार्रवाई के लिए मिली खुली छूट

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को अपना काम पूरी स्वतंत्रता से करने के सख्त निर्देश दिए हैं। एनआईए को यह पूरी आजादी मिली है कि वह जरूरत पड़ने पर नई एफआईआर दर्ज कर सकती है। अगर इस घटना में अलग वजहों से दूसरे लोग शामिल मिले, तो उन पर कार्रवाई होगी। अदालत ने एनआईए को समय पर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।

न्यायिक स्वतंत्रता पर किसी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायिक अधिकारियों पर हमले बर्दाश्त नहीं होंगे। न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। जजों को बिना किसी डर के अपना काम करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को भविष्य के लिए एक बहुत ही सख्त चेतावनी दी है। प्रशासन को हर हाल में न्यायपालिका की सुरक्षा सुनिश्चित करनी ही होगी।

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