ऊना जिला परिषद चुनाव: टक्का वार्ड में कांग्रेस के भीतर घमासान, शोभित गौतम ने भरी हुंकार

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के बीच ऊना जिला परिषद की राजनीति गरमा गई है। जिला परिषद के टक्का वार्ड में मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, क्योंकि यहां कांग्रेस पार्टी दो फाड़ नजर आ रही है। एक तरफ युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभित गौतम चुनावी मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के स्थानीय नेतृत्व ने सुमित कुमार को अपना आधिकारिक समर्थन दे दिया है। इस राजनीतिक खींचतान ने टक्का वार्ड के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।

कांग्रेस की अंतर्कलह आई सामने

टक्का वार्ड को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के भीतर गहरा विवाद पैदा हो गया है। शोभित गौतम जिला कांग्रेस अध्यक्ष देशराज गौतम के पुत्र हैं और लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। हालांकि, ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा और कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने सुमित कुमार को पार्टी समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया है। जिला अध्यक्ष के पहले के बयानों के विपरीत, स्थानीय ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने विधायक की उपस्थिति में सुमित के नाम पर मुहर लगा दी है।

शोभित गौतम का विकास पर जोर

नामांकन दाखिल करने के बाद शोभित गौतम ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें राहुल गांधी का आशीर्वाद प्राप्त है, लेकिन वे इस चुनाव को व्यक्तिगत राजनीति के बजाय विकास के मुद्दों पर लड़ रहे हैं। शोभित ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान का हवाला दिया जिसमें पंचायत चुनाव को भाईचारे का चुनाव बताया गया था। उनका कहना है कि वे टक्का वार्ड के 26 हजार मतदाताओं की समस्याओं को सरकारी स्तर पर उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

भाजपा और अनुभवी नेताओं की चुनौती

टक्का वार्ड में केवल कांग्रेस के भीतर ही हलचल नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने भी यहां अपनी रणनीति तैयार कर ली है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में अनुभवी नेता जसवीर बिट्टा चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। बिट्टा का मानना है कि पंचायती राज संस्थाएं ही देश के वास्तविक विकास की नींव होती हैं। वे अनुभव और पुरानी उपलब्धियों के दम पर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे मुकाबला अब त्रिकोणीय होता दिख रहा है।

युवा जोश और अनुभव के बीच मुकाबला

इस चुनाव में एक तरफ युवा नेतृत्व अपनी नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों की साख दांव पर लगी है। टक्का वार्ड में ऊना और कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्रों के गांव शामिल हैं, जो इस सीट को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं। मतदाताओं के पास अब अनुभवी नेताओं और भविष्य की राजनीति के बीच चुनाव करने का विकल्प है। चुनावी परिणाम ही तय करेंगे कि जनता अंतर्कलह से जूझ रही राजनीति को चुनती है या विकास को।

भविष्य की राजनीति का फैसला

जिला परिषद चुनावों के ये परिणाम न केवल स्थानीय निकायों की दिशा तय करेंगे, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी जमीन तैयार करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह गुटबाजी पार्टी के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। यदि युवा प्रत्याशी स्वतंत्र रूप से मजबूत वोट बैंक हासिल करते हैं, तो यह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बड़ा संकेत होगा। फिलहाल, सभी प्रत्याशियों ने ग्रामीण स्तर पर जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है।

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