कानपुर में 1600 करोड़ का महाघोटाला: मजदूर और कबाड़ी निकले ‘करोड़पति’, पप्पू छुरी के खूनी खेल का पर्दाफाश

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Uttar Pradesh News: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने अरबों रुपये के वित्तीय फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने इस महाघोटाले के मुख्य आरोपी महफूज अली उर्फ ‘पप्पू छुरी’ को जाजमऊ इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि पिछले ढाई साल में करीब 1600 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इस पूरे खेल में हवाला और जीएसटी चोरी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।

मजदूरों और कबाड़ियों के नाम पर अरबों का खेल

महफूज अली का काम करने का तरीका बेहद शातिर और हैरान करने वाला था। वह कम पढ़े-लिखे मजदूरों, पेंटरों और कबाड़ियों को अपना शिकार बनाता था। उनके पैन कार्ड और [Aadhaar Redacted] जैसे पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बनाई जाती थीं। इस साजिश का असली सूत्रधार फिरोज खान नाम का एक वकील बताया जा रहा है। वह इन फर्जी जीएसटी फर्मों को कानूनी और तकनीकी रूप से तैयार करने का काम करता था। इन निर्दोष लोगों को भनक तक नहीं थी।

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24 लाख की लूट ने खोला 1600 करोड़ का राज

इस महाघोटाले की परतें एक मामूली लूट की घटना के बाद खुलनी शुरू हुईं। श्याम नगर में 16 फरवरी को वासिद और अरशद नामक युवकों से 24 लाख रुपये लूट लिए गए थे। जांच के दौरान पता चला कि ये दोनों ‘पप्पू छुरी’ के लिए काम करते थे। जब पुलिस ने महफूज के खातों की पड़ताल की, तो ढाई साल में 1600 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन का पता चला। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी को दबोच लिया।

ससुराल कोलकाता में टीएमसी नेता की पनाह में था आरोपी

पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही महफूज अली फरार होकर कोलकाता स्थित अपनी ससुराल भाग गया था। वहां वह एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता की शरण में छिपा हुआ था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद जब वहां सत्ता बदली, तो महफूज का संरक्षण खत्म हो गया। इसके बाद वह एक मुखबिर के झांसे में आकर वापस कानपुर लौटा। पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर जाजमऊ में घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार करने में सफलता पाई।

बेरोजगार आरती के नाम पर 100 करोड़ का लेनदेन

धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों की हालत देखकर पुलिस भी दंग रह गई। जाजमऊ की रहने वाली आरती मजदूरी कर अपना गुजारा करती हैं, लेकिन उनके नाम पर ‘आरती इंटरप्राइजेज’ बनाकर 100 करोड़ का लेनदेन किया गया। इसी तरह कबाड़ी अजय शुक्ला के नाम पर 21 करोड़ और पेंटर निखिल के नाम पर 7.75 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ। फर्जी दस्तावेजों के जरिए ‘राजा इंटरप्राइजेज’ और अन्य फर्मों से भी करोड़ों रुपये इधर-बदल किए गए। पुलिस अब पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है।

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