नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी के सामने गरजे सीएम सुक्खू, हिमाचल के लिए मांगी 50,000 करोड़ की भारी-भरकम मदद

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Delhi News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने देश की राजधानी में आयोजित नीति आयोग की हाई-लेवल बैठक में हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने पहाड़ी राज्य के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए वित्तीय संकट से जुड़े कई बड़े और महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राज्य के वित्तीय घाटे का सही आकलन करने के लिए तुरंत एक स्पेशल हाई-लेवल कमेटी बनाई जाए। यह कमेटी राजस्व घाटा अनुदान बंद होने और प्राकृतिक आपदाओं से हुए भयंकर नुकसान की विस्तृत समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपे।

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जीएसटी और जलविद्युत परियोजनाओं में हिस्सेदारी पर बड़ा दावा

मुख्यमंत्री ने बैठक में पुरजोर तरीके से कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली मुफ्त बिजली के उचित हिस्से से पूरी तरह वंचित चल रहा है। इसके साथ ही नए माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी सिस्टम से भी राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है।

विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास विषय पर आयोजित नीति आयोग की शासी परिषद की इस 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की चुनौतियों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन तमाम भौगोलिक और आर्थिक दिक्कतों के बावजूद हिमाचल देश की प्रगति में बड़ा योगदान दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर गंभीर चर्चा की गई। राज्य सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्तीय सहायता में कटौती पर भारी चिंता जताई।

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर केंद्र से मांगी दोगुनी राहत

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान को अचानक पूरी तरह बंद करने से हिमाचल की नाजुक अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस अभूतपूर्व नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से पूर्व में स्वीकृत निधि पर्याप्त नहीं है।

सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से इस राहत राशि को पच्चीस हजार करोड़ से सीधे बढ़ाकर पचास हजार करोड़ रुपये करने की बड़ी मांग की है। उन्होंने दलील दी कि राज्य में चल रहे विकास कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए यह वित्तीय पैकेज बेहद जरूरी है।

Reported By: Sunita Gupta

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