Bhojpur News: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की एंट्री हो गई है। उन्होंने इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी राय रखी है। बाबा बागेश्वर ने एलान किया है कि वे पीड़ित परिवार से मिलने खुद गांव जाएंगे।
भोजपुर में आयोजित एक बड़ी महापंचायत के दौरान बाबा बागेश्वर ने इस घटना पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपी मान लेने से उसे न्याय के बुनियादी अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। लोकतांत्रिक देश में सजा देने का अंतिम अधिकार सिर्फ हमारी न्यायपालिका को है।
सनातन और हिंदू हितों के लिए सक्रिय युवा था भरत तिवारी
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शाहपुर प्रखंड के बिटौली गांव जाने की आधिकारिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे वहां जाकर भरत के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने इस कथित मुठभेड़ की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग राज्य सरकार के सामने रखी है।
बाबा बागेश्वर ने पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि वे भरत तिवारी को एक सक्रिय युवा के रूप में जानते थे। वह सनातन समाज और हिंदू हितों से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर हमेशा आगे रहता था। भरत की संदिग्ध मौत को लेकर उठ रहे सवालों का पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए।
सरेंडर के बाद गोली मारने के आरोपों पर उठाए गंभीर सवाल
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति पर कोई गंभीर आरोप थे, तो उसकी सही तरीके से अदालती सुनवाई होनी चाहिए थी। समाज में किसी भी तरह का भ्रम रोकने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने आत्मसमर्पण के बाद भी गोली चलाए जाने के दावों पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति, धर्मग्रंथों और कानून की मूल भावना यही है कि शरण में आए व्यक्ति को पूरा न्याय मिले। बाबा ने याद दिलाया कि भरत कभी आरा से पैदल यात्रा करके बागेश्वर धाम पहुंचा था। वह विभिन्न सामाजिक वर्गों को आपस में जोड़ने का काम करता था।
न्यायिक जांच के आदेश के बाद मामले पर टिकीं सबकी नजरें
इस एनकाउंटर को लेकर बिहार में पहले से ही भारी राजनीतिक और सामाजिक विवाद चल रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि भरत ने खुद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। इसके बावजूद उसे करीब से गोलियां मारी गईं। वहीं स्थानीय पुलिस इस पूरी कार्रवाई को आत्मरक्षा बता रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नीतीश सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या की धाराओं में एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। अब बाबा बागेश्वर के समर्थन के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

