Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकारी फैसले पर रोक लगाने के बाद ग्रामीण इलाकों में संकट गहरा गया है। इस अदालती आदेश के कारण प्रयागराज जिले के मेजा और मांडा क्षेत्र की दर्जनों ग्राम पंचायतों में चल रहे सभी विकास कार्य इस समय पूरी तरह ठप हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन के पास वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का स्पष्ट मार्गदर्शन नहीं होने से गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। नालियों की सफाई, सड़कों की मरम्मत और पेयजल जैसी जरूरी जनसुविधाएं ठप होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अदालती आदेश के बाद वित्तीय लेन-देन पूरी तरह बंद
अदालत के स्टे ऑर्डर के बाद ग्राम पंचायतों के बैंक खातों से होने वाला वित्तीय लेन-देन पूरी तरह बंद हो गया है। इसके चलते विकास कार्यों के लिए जरूरी निर्माण सामग्री की सप्लाई रुक गई है। वहीं दूसरी तरफ गांवों में तैनात सफाई कर्मियों और मजदूरों का दैनिक मानदेय भी फंस गया है।
पंचायत सचिवों और खंड विकास अधिकारियों के स्तर पर भी नई योजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी नहीं मिल पा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि इस गतिरोध को खत्म करने के लिए जल्द ही कोई वैकल्पिक कानूनी रास्ता निकाला जाए ताकि गांवों का विकास दोबारा शुरू हो सके।

