Himachal Pradesh News: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित मीर बक्श भूमि विवाद मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने जुलाई 2023 के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है।
इस बड़े फैसले के बाद अब राज्य सरकार के लिए मीर बक्श को 110 बीघा जमीन देना कानूनी रूप से अनिवार्य हो गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने इस मामले की गहन सुनवाई की। बेंच ने कहा कि रिव्यू पिटीशन में फैसले की समीक्षा का कोई ठोस आधार नहीं मिला।
सर्वोच्च अदालत ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांशु राणा की याचिका को खारिज करते हुए सभी पेंडिंग अंतरिम आवेदनों को भी समाप्त कर दिया है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब सरकार को बिना किसी देरी के पूर्व आदेश का पालन करते हुए जमीन का ट्रांसफर करना होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाते हुए मंडी, सुंदरनगर, बल्ह और नाचन क्षेत्रों में जमीनें चिन्हित की हैं। विभिन्न सरकारी विभागों के पास उपलब्ध इस खाली भूमि का पूरा ब्यौरा तैयार किया गया है। अधिकारियों ने यह फाइनल प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है।
मीर बक्श के मुताबिक सरकार ने पूर्व में उनकी अत्यंत मूल्यवान जमीन का अधिग्रहण किया था। वर्तमान मार्केट वैल्यू के हिसाब से उस जमीन की कीमत 1100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इसी वजह से पीड़ित पक्ष ने समान महत्व और उतनी ही उपयोगिता वाली प्राइम लैंड की मांग की थी।
मंडी प्रशासन ने विभिन्न सरकारी विभागों की भूमि की चिन्हित
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार नेरचौक मेडिकल कॉलेज के पास लगभग 15 बीघा जमीन को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा कृषि विभाग के फार्म और एचपीएमसी के बगीचे की जमीन भी इस लिस्ट में शामिल है। सेरीकल्चर और उद्योग विभाग की जमीनों को मिलाकर 110 बीघा का प्रस्ताव तैयार हुआ है।
मंडी जिला प्रशासन ने अपनी सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम आदेश के बाद अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब हर किसी की नजरें मुख्यमंत्री और कैबिनेट के अगले बड़े कदम पर टिकी हुई हैं।
Reported By: Sunita Gupta

