मुंह का कैंसर: पहली स्टेज से लेकर आखिरी चरण तक के लक्षण, समय रहते पहचानना है जरूरी

Health News: ओरल कैंसर या मुंह का कैंसर तब होता है जब कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह जानलेवा बीमारी जीभ, मसूड़ों, गालों के अंदरूनी हिस्से या होंठों पर हमला कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य छाला या संक्रमण मानकर अनदेखा कर देते हैं। यदि इसे पहली स्टेज में ही पहचान लिया जाए, तो सफल इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए मुंह में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव के प्रति सतर्क रहना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

पहली स्टेज के लक्षण: शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज

मुंह के कैंसर की पहली स्टेज में शरीर कुछ खास संकेत देता है। यदि मुंह में छाला हो और वह तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक न हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा मुंह के अंदर लाल या सफेद धब्बे नजर आना भी खतरे की घंटी है। जीभ पर जमने वाली सफेद परत, जो रगड़ने पर भी न हटे, कैंसर का लक्षण हो सकती है। निगलने में कठिनाई, आवाज में बदलाव और बिना वजह वजन कम होना इस बीमारी के शुरुआती संकेतों में शामिल हैं।

दूसरी और तीसरी स्टेज: जब ट्यूमर होने लगता है गंभीर

दूसरी और तीसरी स्टेज में पहुंचने पर कैंसर का ट्यूमर बड़ा होने लगता है। यह अब केवल मुंह तक सीमित न रहकर गर्दन और सिर के हिस्सों को भी प्रभावित करने लगता है। इस दौरान जबड़े, होंठ और जीभ के हिस्सों में सुन्नपन महसूस हो सकता है। नसों में खिंचाव के कारण मरीज को तीव्र दर्द का अनुभव होता है। सलाइवा (लार) बनाने वाली ग्रंथियों और लिम्फ नोड्स में सूजन आने लगती है। मरीज के लिए खाना चबाना और मुंह खोलना या बंद करना भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

चौथी या आखिरी स्टेज: एडवांस कैंसर की भयावहता

ओरल कैंसर की चौथी स्टेज सबसे एडवांस और खतरनाक मानी जाती है। इस चरण में कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों तक फैलने लगती हैं। प्रभावित अंगों में या तो पूरी तरह सुन्नपन आ जाता है या असहनीय दर्द होता है। जबड़े की मांसपेशियों पर नियंत्रण खत्म हो जाता है, जिससे मुंह एक ही स्थिति में फंसा रह सकता है। इस स्थिति में दांत खुद-ब-खुद गिरने लगते हैं और जीभ या जबड़े की हड्डी में भारी सूजन आ जाती है। अंतिम स्टेज में इलाज काफी जटिल और कष्टकारी हो जाता है।

बचाव और सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय

मुंह के कैंसर से बचने के लिए तंबाकू, सिगरेट और शराब जैसे नशीले पदार्थों से दूरी बनाना अनिवार्य है। नियमित रूप से ओरल चेकअप और डेंटिस्ट की सलाह लेने से बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ा जा सकता है। यदि आपको गले में कोई गांठ, बोलने में तकलीफ या मुंह के अंदर दर्द महसूस हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें। संतुलित आहार और साफ-सफाई के जरिए भी कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। याद रखें, समय पर की गई जांच ही कैंसर के खिलाफ सबसे मजबूत ढाल है।

Hot this week

Related News

Popular Categories