New Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक एक बड़े कूटनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर अपने देश के खिलाफ सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। गुरुवार को हुई इस बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। इस टकराव ने न केवल बैठक का माहौल तनावपूर्ण कर दिया, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के समीकरणों को भी हिला कर रख दिया है।
नेतन्याहू के दौरे और इजरायल के मुद्दे पर छिड़ी तीखी जंग
विवाद की असली शुरुआत इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खाड़ी देशों के प्रस्तावित दौरे से जुड़े दावों के बाद हुई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो देश इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्रीय फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें अंजाम भुगतना होगा। हालांकि यूएई ने इजरायल के साथ मिलीभगत के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। अराक़ची ने बाद में कहा कि उन्होंने ब्रिक्स की एकजुटता बनाए रखने के लिए अपने आधिकारिक भाषण में यूएई का नाम नहीं लिया था।
ईरान का दावा: यूएई आक्रामकता का सिर्फ सहयोगी नहीं बल्कि हमलावर है
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अराक़ची ने साफ शब्दों में कहा कि यूएई तेहरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता में सक्रिय रूप से शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पर हुए हमलों के दौरान अबू धाबी ने चुप्पी साधे रखी और आलोचना तक नहीं की। इसके बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने आरोपों को और कड़ा कर दिया। उन्होंने 1974 के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का हवाला देते हुए यूएई को महज एक सहयोगी नहीं, बल्कि एक ‘हमलावर देश’ करार दिया।
यूएनएससी को सौंपे गए 120 से ज्यादा सीक्रेट दस्तावेज और सबूत
ईरान ने दावा किया है कि उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) को 120 से अधिक राजनयिक नोट और पुख्ता दस्तावेज सौंपे हैं। तेहरान का आरोप है कि उसके पास उन लड़ाकू विमानों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, जिन्होंने यूएई की जमीन से उड़ान भरकर ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि किसी देश की जमीन का इस्तेमाल हमलों के लिए हुआ, तो उसे वैध सैन्य निशाना माना जाएगा।
क्या था ईरान युद्ध और कैसे बिगड़े खाड़ी देशों के रिश्ते
क्षेत्रीय तनाव की जड़ें 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में छिपी हैं, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन दागे थे। ईरान का कहना है कि उसने यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वहां से उसे खतरा था। कड़े आरोपों के बावजूद अराक़ची ने अंत में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात कही। लेकिन मौजूदा विवाद ने ब्रिक्स के साझा घोषणापत्र (Joint Statement) के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

