Uttar Pradesh News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर हमेशा गंभीर शोध और जटिल पढ़ाई के लिए मशहूर है। लेकिन हाल ही में कैंपस का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। छात्रों ने यहां एक अनोखी शादी रचाई है। यह मजेदार शादी पिछले बत्तीस सालों से चली आ रही विदाई परंपरा का अहम हिस्सा है। इस आयोजन ने लोगों का खूब ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पर इस दिलचस्प शादी के वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहे हैं। नेटिजन्स इसे इंजीनियरिंग छात्रों का एक बेहतरीन क्रिएटिव ब्रेक बता रहे हैं।
विज्ञान के सूत्रों से संपन्न हुए फेरे
इस शादी की रस्में आम शादियों से बिल्कुल अलग और बेहद खास थीं। विवाह के दौरान संस्कृत के श्लोकों की जगह विज्ञान और गणित के मुश्किल फॉर्मूले पढ़े गए। छात्र ही यहां पंडित की भूमिका में नजर आए। जब फेरों के लिए पवित्र अग्निकुंड तैयार किया गया, तो उसमें लकड़ी की जगह बीटेक के नोट्स जलाए गए। यह अनोखा तरीका छात्रों की चार साल की कड़ी मेहनत का एक शानदार प्रतीक था। इसके जरिए उन्हें प्लेसमेंट के भारी तनाव से भी मुक्ति मिली।
हॉस्टल में हुआ पूर्व प्रेमी का हाई वोल्टेज ड्रामा
शादी के इस शानदार कार्यक्रम में पूरा फिल्मी ड्रामा भी देखने को मिला। बारात बड़े जोश के साथ लड़कों के ‘हॉल वन’ से निकलकर लड़कियों के ‘हॉल सिक्स’ पहुंची। तभी वहां अचानक एक पूर्व प्रेमी की नाटकीय एंट्री हुई। उसके हाथ में एक नकली पिस्तौल और डंडा था। उसने जमकर हंगामा किया और शादी को रोकने की पूरी कोशिश की। इसके बाद दूल्हे और पूर्व प्रेमी के बीच मजेदार तलवारबाजी हुई। दोनों ने एक दूसरे पर जमकर शेरोशायरी भी की।
विदाई के गम को खुशी में बदलने की शानदार परंपरा
कड़ी मशक्कत और ड्रामे के बाद बारातियों ने अपना फैसला सुनाया और सच्चे प्यार की जीत हुई। बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र कुमार विशाल इस शादी में दूल्हा बने थे। वहीं छात्र विदित परमार ने दुल्हन का शानदार किरदार निभाया। शादी में हल्दी और मेहंदी की रस्में बिल्कुल असली विवाह की तरह पूरी की गईं। छात्राओं के हॉस्टल में एक खास संगीत कार्यक्रम भी हुआ। शिक्षकों ने बताया कि इस अनूठी परंपरा की शुरुआत साल उन्नीस सौ चौरानवे में हुई थी।
छात्रों की रचनात्मकता को बढ़ावा देते हैं ऐसे आयोजन
तब से हर साल फाइनल ईयर के छात्र इसे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। यह मजेदार आयोजन सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता है। यह विदाई के भारीपन और गम को खुशी के पलों में बदलने का एक बेहतरीन तरीका है। शिक्षकों का मानना है कि देश के ये तेज दिमाग वाले युवा केवल तकनीक में माहिर नहीं हैं। इन आयोजनों से उनकी रचनात्मकता और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का एक बहुत ही अनूठा नजरिया सामने आता है।


