Delhi News: साल 1975 में देश में लगी इमरजेंसी का असर भारतीय फिल्म उद्योग पर भी पड़ा था। इस दौर में कई फिल्मों को राजनीतिक कारणों से प्रतिबंधित किया गया था। इनमें से सबसे प्रमुख फिल्म आंधी थी, जिसकी रिलीज को लेकर भारी विवाद हुआ था। यह फिल्म लंबे समय तक चर्चाओं और राजनीतिक हलचल का केंद्र बनी रही थी।
फिल्म पर लगे थे इंदिरा गांधी के आरोप
फिल्म आंधी 13 फरवरी, 1975 को रिलीज हुई थी, जिसमें संजीव कुमार और सुचित्रा सेन मुख्य भूमिका में थे। कांग्रेस समर्थकों ने आरोप लगाया कि फिल्म में सुचित्रा सेन का किरदार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आधारित है। उनका मानना था कि यह मूवी इंदिरा गांधी की छवि को नकारात्मक रूप से जनता के सामने प्रस्तुत कर रही थी।
विवाद के बीच फिल्म के लेखक कमलेश्वर ने स्पष्ट किया था कि फिल्म का मुख्य किरदार इंदिरा गांधी से नहीं, बल्कि वरिष्ठ नेत्री तारकेश्वरी सिन्हा से प्रेरित है। तारकेश्वरी सिन्हा स्वतंत्र भारत की पहली महिला राजनेताओं में से एक थीं। हालांकि, उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों के चलते फिल्म को दर्शकों से दूर कर दिया गया था।
शर्त के साथ हटाया गया फिल्म से बैन
हैरानी की बात यह है कि प्रतिबंध लगने से पहले यह फिल्म सिनेमाघरों में बीस सप्ताह से अधिक समय तक सफलतापूर्वक चल चुकी थी। अंत में, निर्देशक गुलजार ने फिल्म में एक अतिरिक्त दृश्य जोड़ने पर सहमति जताई, जिसके बाद बैन हटाया गया। इस दृश्य में इंदिरा गांधी का चित्र दिखाकर उनकी प्रशंसा की गई थी।
वर्ष 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद, इस फिल्म को पहली बार दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। आंधी आज हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म के गाने, विशेषकर लता मंगेशकर और किशोर कुमार द्वारा गाए गए नगमे, आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और सदाबहार माने जाते हैं।
सुचित्रा सेन के करियर की यह महत्वपूर्ण फिल्म उनकी अंतिम हिंदी मूवी साबित हुई, क्योंकि 1978 में उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली थी। फिल्म के लिए संजीव कुमार ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता था। सुचित्रा सेन को भी नामांकन मिला था। संगीतकार मदन मोहन का संगीत इस फिल्म की बड़ी पहचान बन गया था।

