World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे लंबी हाई-लेवल बैठक की है। इस बैठक में ईरान संकट को लेकर किसी बड़े फैसले की उम्मीद थी। हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद भी सीजफायर या अंतिम समझौते पर कोई अंतिम घोषणा नहीं हो सकी।
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल वही समझौता मंजूर करेंगे जो पूरी तरह अमेरिका के हित में होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी तय शर्तों और रेड लाइन्स से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। अमेरिका ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
इस अहम बैठक से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बड़ा दावा किया था। ट्रंप ने कहा था कि ईरान को होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई अपनी सभी सी माइंस को तुरंत हटाना होगा। इसके बाद ही अमेरिकी नौसेना अपनी सख्त नाकेबंदी को खत्म करेगी।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरान के उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम (न्यूक्लियर डस्ट) को खोजकर पूरी तरह नष्ट कर देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। दरअसल, रिपोर्ट्स आई थीं कि ईरान बातचीत से पहले अपनी 12 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति जारी करने की मांग कर रहा है।
तेहरान का दोटूक जवाब- दबाव में कोई अंतिम डील मंजूर नहीं
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि दोनों देशों के बीच केवल संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। इस समय ईरान की सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्ध को रोकना है।
बघाई ने स्पष्ट किया कि अभी यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी मुद्दों पर कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उन्होंने कहा कि इसका भविष्य केवल ईरान और ओमान तय करेंगे। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान बातचीत से नहीं बल्कि अपनी ताकत और मिसाइलों के दम पर रियायत हासिल करता है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को अमेरिकी वादों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। किसी भी समझौते से पहले अमेरिका को जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे।
इन बड़े मुद्दों पर फंसा पेंच, दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद
अमेरिका और ईरान के बीच कई प्रमुख रणनीतिक मुद्दों पर अभी भी गंभीर गतिरोध बना हुआ है। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे। इसके साथ ही वह अपने पास मौजूद सारा संवर्धित यूरेनियम किसी तीसरे देश को सौंप दे।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास इस समय 60% तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम है। यह स्टॉक हथियार-ग्रेड स्तर के बेहद करीब माना जाता है। अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी टैक्स के पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोला जाए।
अमेरिका ने इसके लिए 30 दिनों के भीतर माइंस हटाने की शर्त रखी है। वहीं, ईरान विदेशों में फंसी अपनी करीब 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को तुरंत वापस मांग रहा है। वह इस बात की लिखित गारंटी भी चाहता है कि अमेरिका भविष्य में इस समझौते से दोबारा पीछे नहीं हटेगा।
Author: Pallavi Sharma


