बंगाल में बड़ा उलटफेर: शुभेंदु सरकार का ऐतिहासिक फैसला, क्या अब बंद हो जाएगा धार्मिक आधार पर मिलने वाला सारा सरकारी पैसा?

West Bengal News: पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है। सरकार आगामी 1 जून से राज्य में धर्म के आधार पर दी जाने वाली सभी तरह की आर्थिक मदद को पूरी तरह बंद करने जा रही है। इस बड़े निर्णय से राज्य की सियासत में भारी गरमाहट आ गई है।

धार्मिक भत्ते और छात्रवृत्ति योजनाओं पर बड़ा फैसला

नए नियमों के मुताबिक 1 जून से राज्य में इमामों, मुअज्जिनों और मंदिरों के पुजारियों को मिलने वाला मासिक भत्ता बंद हो जाएगा। पिछली ममता बनर्जी सरकार इन सभी को हर महीने 1,500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता देती थी। इसके अलावा अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को मिलने वाली ऐक्यश्री स्कॉलरशिप योजना पर भी रोक लग जाएगी।

भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा के लिए विशेष जांच आयोग

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए रिटायर्ड जस्टिस बिस्वजीत दास की अगुवाई में एक विशेष जांच आयोग बनाया गया है। साथ ही राज्य में महिलाओं पर हुए अत्याचारों की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस समापति चटर्जी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है।

महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना की शानदार शुरुआत

कैबिनेट ने जनता को बड़ी राहत देते हुए 1 जून से ‘अन्नपूर्णा योजना’ लागू करने की घोषणा की है। इस नई कल्याणकारी योजना के तहत बंगाल की महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की नकद आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके साथ ही सरकार ने सभी महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सुविधा को भी हरी झंडी दे दी है।

सीएए आवेदकों को लाभ और सातवां वेतन आयोग

महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने साफ किया कि नागरिकता कानून (CAA) के तहत आवेदन करने वाली महिलाओं को भी अन्नपूर्णा योजना का पूरा लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। साथ ही हाईकोर्ट के आदेशानुसार पुरानी ओबीसी सूची भी रद्द कर दी गई है।

Author: Sourav Banerjee

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