New Delhi News: भारत में पेट्रोल और डीजल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ईंधन की इस भारी किल्लत से आम जनता बहुत परेशान है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका भी तेज हो गई है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है।
मध्य पूर्व में छिड़े युद्ध ने पूरी दुनिया के कच्चे तेल बाजार को हिला दिया है। ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों पर हमलों से सप्लाई चेन टूट गई है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से ही खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसका सीधा असर अब भारतीय घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। तेल कंपनियों पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
पेट्रोल पंपों पर क्यों लग रही हैं लंबी कतारें?
देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की खबरें आ रही हैं। अफवाहों के कारण लोग अपनी गाड़ियों के टैंक फुल करवा रहे हैं। इस अचानक बढ़ी मांग ने स्थिति को और भी ज्यादा खराब कर दिया है। डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि पीछे से सप्लाई में काफी कमी आई है। कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल का कोटा तय कर दिया है। इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्र सरकार ने इस गंभीर संकट पर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से घबराने और ईंधन जमा न करने की सीधी अपील की है। सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त आपातकालीन तेल भंडार पूरी तरह मौजूद है। अधिकारियों के अनुसार, सप्लाई को सामान्य करने के लिए रूस और अन्य मित्र देशों से बातचीत चल रही है। सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर इस समस्या का तेजी से समाधान निकालने की हर संभव कोशिश कर रही है।
महंगाई बढ़ने का मंडरा रहा बड़ा खतरा
पेट्रोल और डीजल की कमी से देश में भयंकर महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो हालात और बिगड़ेंगे। इससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। रिजर्व बैंक भी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। सरकार जल्द ही टैक्स में कुछ छूट देकर आम जनता को राहत दे सकती है।

