हल्दीपोखर में प्रदूषण का तांडव: रेलवे साइडिंग ने छीनी ग्रामीणों की सांसें, मुखिया की शिकायत पर जांच टीम का बड़ा एक्शन

Jharkhand News: पूर्वी सिंहभूम जिले के हल्दीपोखर में रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली धूल ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लोडिंग-अनलोडिंग और भारी वाहनों की ओवरलोडिंग से बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पंचायत की मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने इस गंभीर मामले को लेकर प्रदूषण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को पत्र लिखा था। शिकायत के बाद हरकत में आए प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ठेकेदारों को कड़ी चेतावनी दी।

हजारों स्कूली बच्चों और यात्रियों की सेहत पर मंडराता खतरा

हाता-ओड़िशा मुख्य मार्ग क्षेत्र का सबसे व्यस्त रास्ता है, जहां से प्रतिदिन हजारों स्कूली बच्चे और यात्री गुजरते हैं। मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि रेलवे साइडिंग के ठेकेदार प्रदूषण मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। सड़क पर उड़ने वाली धूल के कारण स्थानीय लोग सांस की बीमारियों और एलर्जी की चपेट में आ रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि ठेकेदार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में धूल की मोटी परत जम गई है।

प्रदूषण विभाग की टीम ने साइडिंग का किया औचक निरीक्षण

मुखिया की शिकायत पर प्रदूषण विभाग के कनीय अभियंता मोहम्मद आफताब आलम ने रेलवे साइडिंग का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्होंने पाया कि धूल नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने ठेकेदार को तुरंत नियमित जल छिड़काव करने और स्टॉक प्वाइंट को तिरपाल से ढंकने के निर्देश दिए। साथ ही साइडिंग की घेराबंदी के लिए बाउंड्री वॉल निर्माण और ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। अभियंता ने स्पष्ट किया कि सभी मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा।

ग्रामीणों का आक्रोश और साइडिंग बंद करने की जोरदार मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के अनुसार पिछले पांच वर्षों से रेलवे साइडिंग और धर्म कांटा ने क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित कर दिया है। लोगों का कहना है कि घर के बाहर सोना, कपड़े सुखाना और यहां तक कि ताजी सब्जियों का उपयोग करना भी असंभव हो गया है। जिला परिषद सदस्य सूरज मंडल और मुखिया ने मांग की है कि प्रदूषण से मुक्ति के लिए इस साइडिंग को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाना चाहिए। जांच के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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