Uttarakhand News: उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। धामी कैबिनेट ने बुधवार को हुई बैठक में 11 पहाड़ी जिलों के लिए ‘स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति’ को मंजूरी दे दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पहाड़ की बिखरी हुई जोतों को एकीकृत कर उन्हें खेती के योग्य बनाना है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 275 गांवों के कायाकल्प का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्वैच्छिक चकबंदी के लिए तय की गई कड़ी शर्तें
पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को बंदरों और जंगली जानवरों से बचाने के साथ-साथ प्रबंधन को आसान बनाने के लिए चकबंदी अनिवार्य मानी जा रही थी। नई नीति के तहत केवल उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जो पूरी तरह विवाद रहित हैं। चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने के लिए न्यूनतम 10 हेक्टेयर भूमि या कम से कम 25 काश्तकारों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी। इच्छुक लोग इसके लिए बंदोबस्त अधिकारी या संबंधित एसडीएम के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।
होम स्टे नीति में बड़े बदलाव और नई सुविधाएं
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने होम स्टे नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। अब होम स्टे में कमरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, ‘सामुदायिक होम स्टे’ की अवधारणा को भी हरी झंडी मिली है, जिसके तहत 8-10 लोगों का समूह मिलकर व्यवसाय कर सकेगा। सरकार ने पंजीकरण के नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन और सरल बना दिया है। अब होम स्टे और ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट योजनाओं को एकीकृत कर नई नियमावली बनाई गई है।
कार्मिकों का समायोजन और सेवा नियमावली में संशोधन
कैबिनेट बैठक में चकबंदी विभाग में कार्यरत उत्तर प्रदेश कैडर के 121 कार्मिकों को उत्तराखंड में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए उनसे विकल्प मांगे जाएंगे। साथ ही, राजस्व परिषद में समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) के पदों के लिए योग्यता मानकों को आधुनिक बनाया गया है। अब इन पदों के लिए कंप्यूटर पर 8000 की-डिप्रेशन प्रति घंटा की गति, एमएस ऑफिस और इंटरनेट का बेसिक ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया है।


