Florida News: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) आज अपने सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘आर्टेमिस-II’ (Artemis-II) को लॉन्च करने जा रही है। साल 1972 के अपोलो-17 मिशन के करीब 53 साल बाद यह पहला मौका है जब इंसान दोबारा चांद के इतने करीब पहुंचेगा। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से आज शाम 6:24 बजे (भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल सुबह 3:54 बजे) इस ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग होगी। यह मिशन दुनिया के सबसे ताकतवर ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में भेजा जाएगा।
10 दिन का सफर और चांद का चक्कर
आर्टेमिस-II कोई साधारण मिशन नहीं है, बल्कि यह 10 दिनों का एक चुनौतीपूर्ण ‘फ्लाईबाई’ मिशन है। इसमें ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की सतह पर लैंड नहीं करेगा। यह चांद के चारों ओर अंग्रेजी के ‘8’ (Figure-8) आकार में परिक्रमा कर वापस धरती पर लौटेगा। नासा इस दौरान ओरियन के लाइफ सपोर्ट और नेविगेशन सिस्टम की कड़ी परीक्षा लेगा। इसी तकनीक के आधार पर साल 2027 में इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा और बाद में मंगल तक का रास्ता तय होगा।
पहली बार महिला और अश्वेत यात्री चांद की राह पर
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका क्रू (चालक दल) है। पहली बार चांद के सफर पर एक महिला और एक अफ्रीकन-अमेरिकन अंतरिक्ष यात्री जा रहे हैं। मिशन की कमान पूर्व नेवी पायलट रीड वाइसमैन संभाल रहे हैं। पायलट विक्टर ग्लोवर चांद तक जाने वाले पहले अश्वेत यात्री बनेंगे। वहीं, क्रिस्टीना कोच चांद के पास पहुंचने वाली पहली महिला के रूप में इतिहास रचेंगी। उनके साथ कनाडा के जेरेमी हैनसेन भी पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा करेंगे।
23 लाख किलोमीटर की रिकॉर्ड यात्रा
आर्टेमिस-II के यात्री पृथ्वी से करीब 2,30,000 मील की रिकॉर्ड दूरी तय करेंगे। ओरियन स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side) तक जाएगा, जो पृथ्वी से करीब 10,300 किलोमीटर दूर होगा। इससे पहले नासा ने नवंबर 2022 में आर्टेमिस-I लॉन्च किया था, जो बिना इंसानों वाला एक ट्रायल मिशन था। अमेरिका अब तक चांद पर 6 मिशन भेज चुका है, जिसमें नील आर्मस्ट्रांग की अपोलो-11 की कामयाबी आज भी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
चुनौतियों भरा होगा 10 दिनों का रोमांच
मिशन के पहले दो दिन पृथ्वी की कक्षा में सिस्टम टेस्टिंग होगी। तीसरे दिन ओरियन का इंजन उसे चांद की दिशा में धकेलेगा, जहाँ चार इंसान ब्रह्मांड में अब तक की सबसे अधिक दूरी पर होंगे। पांचवें से आठवें दिन चंद्रमा की ग्रैविटी का इस्तेमाल कर यान खुद वापस मुड़ेगा। सबसे खतरनाक पल आखिरी दो दिन होंगे। जब ओरियन 40,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वायुमंडल में प्रवेश करेगा। अंत में यह प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग (Splashdown) करेगा।

