Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई की है। छह अलग-अलग जिलों में सरकारी नौकरी और अन्य रेगुलर पढ़ाई के साथ डीएलएड (बीटीसी) करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
दो साल का नियमित डिप्लोमा कार्यक्रम
डीएलएड प्रशिक्षण पूरी तरह से दो वर्षीय रेगुलर डिप्लोमा कार्यक्रम है। इस कोर्स के नियमों के मुताबिक, प्रशिक्षण के दौरान डायट या निजी संस्थानों में अभ्यर्थियों की दैनिक उपस्थिति बेहद अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी पदों पर नौकरी करते हुए गुपचुप तरीके से यह डिग्री हासिल कर ली।
जांच में खुली फर्जीवाड़े की परतें
इस पूरे मामले की शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। जांच में एटा का एक अभ्यर्थी लेखपाल के पद पर रहते हुए बीटीसी करता पाया गया। वहीं गाजीपुर का अभ्यर्थी अनुदेशक और चंदौली का एक आरोपी चिकित्सा विभाग में डेटा ऑपरेटर के पद पर तैनात था।
इसके अलावा कौशांबी में पंचायत सहायक और मेरठ में जिला समन्वयक के पद पर कार्यरत रहते हुए डीएलएड की ट्रेनिंग ली गई। कासगंज का एक अन्य मामला भी सामने आया है, जहां अभ्यर्थी एलएलबी की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बीटीसी का कोर्स कर रहा था। इन सभी मामलों में आरोप पूरी तरह सच पाए गए हैं।
भविष्य में कहीं मान्य नहीं होंगे प्रमाण पत्र
पीएनपी ने नियमों के घोर उल्लंघन को देखते हुए इन सभी छह अभ्यर्थियों के डीएलएड और बीटीसी प्रमाण पत्रों को हमेशा के लिए अवैध घोषित कर दिया है। विभाग ने इस सख्त कार्रवाई की आधिकारिक सूचना संबंधित डायट और निजी प्रशिक्षण संस्थानों को भेज दी है। अब ये सर्टिफिकेट किसी भी नौकरी में मान्य नहीं होंगे।
Author: Ajay Mishra


