शिमला के कोर एरिया में निर्माण के बदल गए नियम, अब बिना सरकारी मंजूरी नहीं हिलेगी एक भी ईंट

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के सबसे संवेदनशील कोर एरिया में अब निर्माण कार्य आसान नहीं होगा। सरकार ने यहां किसी भी नए विकास कार्य या भवन निर्माण के प्रस्तावों के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस बड़े फैसले से निर्माण माफिया पर लगाम लगेगी।

नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग यानी टीसीपी ने शिमला प्लानिंग एरिया के डेवलपमेंट प्लान में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस नए नियम को लेकर विभाग के डायरेक्टर हेमिस नेगी की तरफ से एक आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस फैसले से पर्यावरण को सुरक्षा मिलेगी।

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डेवलपमेंट प्लान के नियमों में किया बड़ा संशोधन

विभाग ने शिमला डेवलपमेंट प्लान के चैप्टर-17 यानी प्लानिंग रेगुलेशंस के रेगुलेशन 17.2 में एक नया क्लॉज 1.2 जोड़ दिया है। इस नए कानून के तहत कोर एरिया के अंतर्गत आने वाले किसी भी लोकल अथॉरिटी को नया प्रोजेक्ट मिलते ही उसे सबसे पहले टीसीपी डायरेक्टर को सौंपना होगा।

डायरेक्टर स्तर पर इस पूरे प्रस्ताव का बारीकी से तकनीकी परीक्षण और कड़ा निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद विभाग इस फाइल को अपनी जरूरी सिफारिशों के साथ अंतिम फैसले के लिए सीधे राज्य सरकार को भेजेगा। मुख्यमंत्री और कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद ही इस योजना को पास किया जाएगा।

नियमों पर आम जनता से मांगे सुझाव और आपत्तियां

टीसीपी विभाग ने इस दूरगामी नीतिगत संशोधन पर आम जनता और प्रभावित पक्षों से 30 दिनों के भीतर अपनी आपत्तियां और रचनात्मक सुझाव मांगे हैं। यदि किसी नागरिक को नए नियमों से कोई परेशानी है, तो वह अपनी बात लिखित रूप में विभाग के सामने दर्ज करवा सकता है।

लोग अपनी लिखित आपत्ति टीसीपी डायरेक्टर दफ्तर, टाउन प्लानर ऑफिस या नगर निगम शिमला के कमिश्नर के पास जमा कर सकते हैं। इन सभी सुझावों और आपत्तियों की गहन समीक्षा करने के बाद ही इस बड़े संशोधन को अंतिम रूप देकर सरकारी राजपत्र में पूरी तरह अधिसूचित किया जाएगा।

Reported By: Sunita Gupta

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