ईरान युद्ध के बीच भारत ने तैयार किया अपना ‘अभेद्य कवच’, 400 KM दूर से ही दुश्मनों के परखच्चे उड़ाएगा ‘प्रोजेक्ट कुश’

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National News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर तेजी से काम कर रहा है। इसके तहत देश का पहला स्वदेशी और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया जा रहा है। यह सिस्टम रूस के एस-400 और अमेरिका के पैट्रियट सिस्टम को भी सीधी टक्कर देगा। भारतीय वायुसेना ने इस महाविनाशक रक्षा प्रणाली के पांच स्क्वाड्रन खरीदने को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके सफल परीक्षणों के बाद भारत की हवाई सुरक्षा अब एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है।

तीन परतों वाला अभेद्य सुरक्षा चक्र

‘प्रोजेक्ट कुशा’ को आधिकारिक तौर पर एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (ERADS) नाम दिया गया है। यह खास सिस्टम तीन अलग-अलग लेयर (परतों) में काम करेगा। इसमें तीन तरह की बेहद घातक इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल की गई हैं। पहली मिसाइल 150 किलोमीटर तक मार करेगी। दूसरी मिसाइल की रेंज 250 किलोमीटर होगी। वहीं तीसरी मिसाइल 350 से 400 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को मौत की नींद सुला देगी।

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फाइटर जेट और ड्रोन से लेकर मिसाइलें होंगी नाकाम

यह स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन के हर वार को हवा में ही नाकाम कर देगा। यह स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और खतरनाक ड्रोन को आसानी से नष्ट कर देगा। इसके उन्नत रडार 500 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन की हर हरकत को भांप लेंगे। यह सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करके उन पर अचूक निशाना लगा सकता है। यह अत्याधुनिक सेंसर और तेज गति वाली तकनीक से पूरी तरह लैस है।

मिशन सुदर्शन चक्र का सबसे अहम हिस्सा

यह प्रोजेक्ट भारत के बहुप्रतीक्षित ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मिशन का लक्ष्य 2035 तक पूरे देश को एक मजबूत एयर और मिसाइल डिफेंस नेटवर्क से जोड़ना है। सरकार ने इस पूरी परियोजना के लिए करीब 21,700 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पास किया है। डीआरडीओ ने इसके शुरुआती परीक्षणों में बड़ी सफलता हासिल की है। इसके पूरी तरह तैयार होने के बाद भारत को विदेशी हथियारों का मुंह नहीं देखना पड़ेगा।

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