Ayodhya News: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख स्थानीय ट्रस्टी ही करते थे।
अहम बैठक से पहले सामने आया पत्र, नैतिक जिम्मेदारी की बात
यह बयान ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक से ठीक एक दिन पहले आया है। कोषाध्यक्ष गिरि ने ही पिछले दिनों एक पत्र जारी कर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ न्यासी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की थी। दोनों ने विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
आलोचनाओं पर दिया जवाब, बोले- सच के साथ खड़ा हूं
इस मामले में खुद पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए गोविंद देव गिरि ने कहा कि हम न तो किसी के पक्ष में हैं और न ही किसी के खिलाफ, हम केवल सच के साथ खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी पद का लालच नहीं है और उन्होंने यात्राओं के लिए ट्रस्ट से एक भी रुपया नहीं लिया है।
चढ़ावे की पुख्ता गिनती के लिए पारदर्शी प्रबंधन प्रणाली बनाने की मांग
गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट के सदस्यों से अपील की है कि भविष्य में पूरी सतर्कता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएं। विशेषज्ञों की सलाह लेकर एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली बनाई जानी चाहिए ताकि भक्तों द्वारा दिए गए दान के एक-एक पैसे का सही हिसाब रखा जा सके।
चेकबुक और हिसाब-किताब के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट पर निर्भरता
उन्होंने बताया कि वह पुणे में रहते हैं, इसलिए आय और खर्च की समीक्षा के लिए पुणे कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हर महीने अयोध्या आते हैं। गिरि ने कहा कि वह अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं और उनके पास चेकबुक भी नहीं है। मंदिर के सभी खर्च और भुगतान सीधे बैंक खातों के जरिए डिजिटल माध्यम से किए जाते हैं।
जांच एजेंसियों पर जताया भरोसा, दोषियों को कड़ी सजा देने की अपील
कोषाध्यक्ष ने विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि भक्तों के दान की चोरी करना एक घिनौना पाप है, जिससे लाखों सनातनी आहत हैं। इस घटना की पूरी निष्पक्ष जांच होगी और किसी भी दोषी को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।

