World News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ओमान तट पर एक कमर्शियल जहाज पर अमेरिकी नौसेना के हमले से हड़कंप मच गया है। इस भीषण सैन्य कार्रवाई में जहाज पर सवार दो भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है। वहीं एक भारतीय चीफ इंजीनियर अभी भी लापता हैं।
सीमेंस यूनियन और विदेश मंत्रालय ने की घटना की पुष्टि
समुद्री कंपनियों के हवाले से ‘सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया’ ने इस दर्दनाक हादसे की पुष्टि की है। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय मरीन क्रू की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत सरकार इस घटना से बेहद खफा है।
हमले का शिकार हुए इस कमर्शियल शिप का नाम ‘एमटी सेटेबेलो’ है। इस जहाज पर पलाऊ देश का झंडा लगा हुआ था। घटना के वक्त इस बड़े कार्गो शिप पर कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर ड्यूटी पर तैनात थे। अचानक हुए हमले से वहां कोहराम मच गया।
ओमान के साथ मिलकर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
विदेश मंत्रालय के अनुसार घटना के तुरंत बाद ओमान की अथॉरिटी के साथ मिलकर एक बड़ा सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस त्वरित कार्रवाई की बदौलत जहाज पर फंसे 24 भारतीयों में से 21 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
इस अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले पहले नाविक की पहचान हिमाचल प्रदेश के रहने वाले 23 वर्षीय आदित्य शर्मा के रूप में हुई है। दूसरे मृतक नाविक उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले शिवानंद चौरसिया हैं। इस खबर से परिवारों में मातम छाया है।
आंध्र प्रदेश के रहने वाले चीफ इंजीनियर लापता
जहाज के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वे आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। लापता इंजीनियर की सुरक्षित तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार समंदर में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। जहाज से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
एफएसयूआई के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि ‘एमटी सेटेबेलो’ अमेरिकी प्रतिबंधों की ब्लैकलिस्ट में शामिल नहीं था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि यह जहाज ईरान से तेल ले जाकर अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था।
भारत सरकार ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर दर्ज कराया विरोध
इस बीच भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर भारतीय नागरिकों वाले सिविलियन शिप को निशाना बनाने पर बेहद कड़ा और आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है।
साउथ ब्लॉक ने साफ शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। वैश्विक जलमार्गों पर जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही जल्द बहाल हो। भारत सरकार अपने नागरिकों के शवों को वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है।
Reported By: Pallavi Sharma

