पटना में मौत के कुएं बने 90% होटल! फायर ऑडिट में ढांचा फेल, पाल होटल जैसे बड़े हादसे का डर

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Patna News: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद डरावनी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला प्रशासन के हालिया फायर ऑडिट में पटना के 90 प्रतिशत होटलों का ढांचा पूरी तरह फेल पाया गया है। ये सभी होटल काफी पुराने हैं, जिन्हें बहुत पहले एमएसएमई द्वारा लाइसेंस जारी किया गया था।

स्टेशन रोड स्थित पाल होटल में हुई भीषण आगजनी की घटना के बाद फायर डिपार्टमेंट ने यह विशेष ऑडिट अभियान चलाया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, शहर के अधिकांश होटलों का आर्किटेक्चर ऐसा है कि वहां आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव कार्य शुरू करना लगभग नामुमकिन है।

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इमरजेंसी गेट गायब, संकरी सीढ़ियों ने बढ़ाई आफत

अग्निशमन विभाग की जांच में कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। होटलों में न तो इमरजेंसी गेट बनाए गए हैं और न ही दमकल गाड़ियों के आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी गई है। मकान मालिकों ने ज्यादा मुनाफे के चक्कर में जरूरत से ज्यादा छोटे-छोटे कमरों का निर्माण करवा दिया है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वे इन पुराने होटलों के बुनियादी ढांचे को रातों-रात बदल नहीं सकते हैं। यही वजह है कि अब केवल जरूरी फायर इक्विपमेंट और मूलभूत जीवन रक्षक सुविधाओं को आधार बनाकर ही इन होटलों को एनओसी (NOC) जारी करने की मजबूरी बनी हुई है।

लोदीपुर क्षेत्र की स्थिति सबसे ज्यादा भयावह

पटना के सबसे व्यस्त और पॉश माने जाने वाले लोदीपुर अग्निशमन कार्यालय क्षेत्र से सबसे डरावने आंकड़े मिले हैं। इस व्यावसायिक इलाके में कुल 155 होटल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इनमें से सिर्फ 27 होटलों के पास ही वैध एनओसी है, जबकि 128 होटलों में सुरक्षा इंतजाम अधूरे हैं।

याद दिला दें कि इसी लोदीपुर क्षेत्र के पाल होटल में 25 अप्रैल 2024 को एक भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें छह मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस बड़े हादसे के बाद भी इस इलाके के 82 प्रतिशत होटल संचालक नियमों को लेकर पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं।

कंकड़बाग और पटना सिटी में सुरक्षा को लेकर सतर्कता

लोदीपुर की तुलना में पटना के अन्य घने उपनगरीय इलाकों में सुरक्षा को लेकर बेहतर सतर्कता देखने को मिली है। पटना सिटी क्षेत्र के कुल 13 होटलों में से 12 ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह अपना लिया है। यहां का ट्रैक रिकॉर्ड 92 प्रतिशत के साथ सबसे शानदार रहा है।

इसी तरह कंकड़बाग क्षेत्र के 13 में से 11 होटलों ने अपना सुरक्षा ऑडिट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वीआईपी और प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र सचिवालय क्षेत्र के आठ में से सात होटल पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। वहीं दानापुर के 29 होटलों में से 17 अब भी मानकों के विपरीत चल रहे हैं।

ग्रामीण इलाकों का रिकॉर्ड बेहतर, हॉटस्पॉट चिह्नित

छोटे शहरी और ग्रामीण अंचलों की बात करें तो बाढ़ क्षेत्र के सभी तीन होटलों ने 100 प्रतिशत का रिकॉर्ड बनाते हुए सुरक्षा प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है। दूसरी तरफ फुलवारीशरीफ अंचल के तहत आने वाले 18 होटलों में से केवल सात ने ही नियमों का पूर्ण अनुपालन किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पटना जिले में हर साल छोटी-बड़ी 600 से अधिक अग्निकांड की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। विभाग ने सुरक्षा के लिहाज से शहर में कुल 18 संवेदनशील हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। इनमें मुख्य रूप से कोतवाली, गांधी मैदान, पाटलिपुत्र, मीठापुर और पीरबहोर जैसे व्यस्त इलाके शामिल हैं।

पाल होटल हादसे के बाद 14 होटल किए गए सील

प्रशासनिक सख्ती के तहत पाल होटल अग्निकांड के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले 14 होटलों को सील किया जा चुका है। पटना में पिछले तीन वर्षों में कई बड़े हादसे हुए हैं, जिनमें 15 सितंबर 2024 को बैंक्वेट होटल और 1 जुलाई 2025 को दानापुर रेस्टोरेंट की आग शामिल है।

अग्निशमन विभाग वर्तमान में 5 हाईटेक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, 22 वाटर टेंडर, 8 फोम टेंडर, 39 एमटी और 10 एमटी बाइक जैसे आधुनिक वाहनों के साथ राहत कार्य संभाल रहा है। प्रशासन ने सभी बकायेदार होटलों को जल्द से जल्द सुरक्षा मानक पूरे करने की सख्त चेतावनी जारी की है।

Amit Yadav

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