होर्मुज संकट के बीच भारत का खुफिया प्लान-बी एक्टिव, ओमान और वेनेजुएला से तेल लाकर अमेरिका-ईरान को चौंकाया

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Delhi News: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद होने के बाद दुनिया भर में तेल की किल्लत होने लगी है। इस भीषण आपातकाल से निपटने के लिए भारत ने अपना विशेष ‘प्लान-बी’ मैदान में उतार दिया है।

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन हमेशा कहते थे कि केवल जीडीपी बढ़ाकर मजबूत राष्ट्र निर्माण संभव नहीं है। उनका मानना था कि संकट काल में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने वाली विदेश नीति जरूरी है। आज भारत की कूटनीति में सेन के इसी दूरदर्शी विचार की साफ झलक दिखाई दे रही है।

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होर्मुज की घेराबंदी के बीच ओमान-वेनेजुएला बने संकटमोचक

भारतीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अमेरिकी महाद्वीप के बड़े तेल उत्पादक वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज इस समय भारत दौरे पर हैं। दोनों देश तेल आपूर्ति बढ़ाने के लिए लगातार उच्च स्तरीय बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत ने खाड़ी देश ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी लागू कर दिया है।

इस बड़े समझौते के बाद होर्मुज क्षेत्र में भारी तनाव के बावजूद ओमान से भारत को कच्चे तेल की निर्बाध सप्लाई जारी रहेगी। मुश्किल वक्त में ओमान और वेनेजुएला से आने वाला यह ईंधन देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा। वेनेजुएला इस समय भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश बन चुका है।

ओमान से होने वाली सप्लाई पर ईरान क्यों है खामोश

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब ईरान इस समुद्री रास्ते पर सख्त है, तो वह ओमान की सप्लाई क्यों नहीं रोकता। इसके पीछे दो मुख्य भौगोलिक और कूटनीतिक कारण हैं। ओमान से भारत आने वाला तेल दुक्म और सलालाह बंदरगाहों से चलता है, जो सीधे अरब सागर पर स्थित हैं।

इन बंदरगाहों का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के विवादित रास्ते से कोई भौगोलिक संबंध नहीं है। इस वजह से ईरान कानूनी तौर पर इस सप्लाई को नहीं रोक सकता। दूसरी तरफ, भारत मध्य पूर्व के इस विनाशकारी युद्ध में पूरी तरह निष्पक्ष रहा है। इस बेहतरीन कूटनीति के कारण ईरान भारत के फैसलों पर कोई आपत्ति नहीं जता रहा है।

समंदर के नीचे बिछेगी सात साल में ऐतिहासिक पाइपलाइन

बदलते वैश्विक समीकरणों को देखते हुए भारत ने ओमान के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का एक मजबूत खाका तैयार किया है। सरकार ने ओमान से आने वाले ९४ प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क घटा दिया है। इस बड़े फैसले से तेल और गैस की सप्लाई करने वाली वैश्विक कंपनियों को भारत में बड़ा प्रोत्साहन मिला है।

गैस आयात को सुरक्षित बनाने के लिए भारत और ओमान समंदर के नीचे एक विशाल अंडर वॉटर पाइपलाइन बना रहे हैं। यह आधुनिक पाइपलाइन ओमान के बंदरगाहों को सीधे गुजरात के तट से जोड़ेगी। अगले सात वर्षों में तैयार होने वाली इस पाइपलाइन से प्रतिदिन ३ करोड़ क्यूबिक मीटर गैस भारत पहुंचेगी।

Author: Rajesh Kumar

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