सावधान! आपकी दवा ही कहीं जान की दुश्मन तो नहीं? हिमाचल की 73 दवाओं के सैंपल फेल, ड्रग्‍स अलर्ट से मचा हड़कंप

- Advertisement -

Himachal News: देशभर में बिकने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के ताजा ड्रग अलर्ट ने देशभर के मरीजों और स्वास्थ्य महकमे में खलबली मचा दी है। इस महीने देशभर में कुल 198 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा 73 सैंपल अकेले हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के हैं।

हिमाचल के बाद उत्तराखंड की 35, गुजरात की 15 और मध्य प्रदेश की 13 दवाओं के सैंपल भी कसौटी पर खरे नहीं उतरे। हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) में बनी दवाओं की गुणवत्ता पर सबसे बड़े सवाल उठे हैं। यहां बनी दवाओं के फेल होने की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। ड्रग कंट्रोलर ने कफ सिरप और इंजेक्शन के सैंपल फेल होने पर कड़ी चेतावनी जारी की है।

- Advertisement -

जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, वे कोई मामूली दवाएं नहीं हैं। इनमें दिल की बीमारी, मिर्गी, बीपी (रक्तचाप) और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा आयरन और विटामिन की दवाओं के नमूने भी मानकों को पूरा करने में असफल रहे। यह स्थिति आम जनता की सेहत के साथ सीधे खिलवाड़ की ओर इशारा करती है।

उत्पादन बंद करने के आदेश और कारण बताओ नोटिस

राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने इस स्थिति पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में दवाओं की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सैंपलिंग की संख्या बढ़ाई गई है। यही वजह है कि अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल में ज्यादा सैंपल फेल नजर आ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अन्य राज्यों में सैंपलिंग का काम कम स्तर पर किया जा रहा है।

हिमाचल वर्तमान में देश का सबसे बड़ा फार्मा हब (दवा उत्पादन केंद्र) है। यहां अन्य राज्यों के मुकाबले दवाओं का उत्पादन बहुत बड़े पैमाने पर होता है। जिन दवा उद्योगों के सैंपल फेल हुए हैं, विभाग उन पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। इन सभी इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कई उद्योगों में दवाओं का उत्पादन तुरंत प्रभाव से बंद करवा दिया गया है।

ड्रग विभाग अब उन सभी उद्योगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगेगा जिनकी दवाओं में खामियां मिली हैं। सरकार का दावा है कि वह दवाओं की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में जीवनरक्षक दवाओं का फेल होना सिस्टम की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े करता है। मरीजों को सलाह दी गई है कि वे दवाओं के बैच नंबर और ड्रग अलर्ट की सूची की जांच जरूर करें।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles