Himachal Pradesh News: पेट्रोल-डीजल की नई पाबंदी से संकट में किसान, सेब बागानों में क्यों मच गया हाहाकार?

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Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर खुली बोतलों, डिब्बों और ड्रमों में तेल बेचने पर लगी रोक से ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संकट खड़ा हो गया है। इस नए सरकारी फरमान के कारण राज्य के हजारों बागवानों और किसानों का दैनिक काम पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच चुका है।

सर्दियों और गर्मियों के इस संधिकाल में सेब के बगीचों में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का काम इस समय अपने चरम पर है। किसान खेतों में इस्तेमाल होने वाले भारी कृषि उपकरणों को सीधे रीटेल आउटलेट या फ्यूल स्टेशन तक नहीं ले जा सकते हैं। इस व्यावहारिक समस्या से खेती का काम धीमा हो गया है।

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केंद्र सरकार के नए आदेश से बढ़ी मुश्किलें

दरअसल, केंद्र सरकार ने तेल की जमाखोरी, अवैध कालाबाजारी और ईंधन के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए “मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल नियंत्रण आदेश 2026” लागू किया है। इस सख्त नियम के तहत किसी भी व्यक्ति को खुले कंटेनरों या प्लास्टिक गैलन में ईंधन देने पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है।

मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले को लेकर बेहद संवेदनशील है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस समस्या के तुरंत समाधान के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय और बड़ी ऑयल कंपनियों के मैनेजमेंट से बातचीत की जाएगी ताकि आवश्यक संशोधन करवाकर राहत दी जा सके।

कृषि और बागवानी मशीनों का संचालन हुआ ठप

हिमाचल प्रदेश के सेब बेल्ट में घास काटने की मशीन, पावर स्प्रेयर, मिनी ट्रैक्टर और वाटर पंप पूरी तरह पेट्रोल या डीजल इंजन से चलते हैं। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने अपना कड़ा विरोध जताने के लिए फ्यूल स्टेशन पर पावर टिलर लाकर प्रदर्शन भी किया।

ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने भी इस व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब देश में तेल की कोई कमी नहीं है, तो बागवानों पर ऐसी पाबंदी क्यों लगाई जा रही है। उन्होंने इस संबंध में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से मिलकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

शिमला प्रशासन ने केंद्र से मांगी विशेष छूट

बढ़ते विवाद के बीच शिमला के जिला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने राज्य सरकार के माध्यम से भारत सरकार को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने मोबाइल टावर ऑपरेटरों, किसानों और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए कंटेनर में सीमित मात्रा में तेल देने की विशेष छूट मांगी है।

उपायुक्त ने मुख्य सचिव से चर्चा के बाद स्पष्ट किया कि जिला शिमला की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह बागवानी पर निर्भर है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में खेतों से पंपों की दूरी बहुत अधिक है। प्रशासन ने मांग की है कि किसानों को पहचान पत्र देखकर निश्चित कोटा के तहत तेल दिया जाना चाहिए।

Reported By: Sunita Gupta

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