New Delhi News: भारतीय पावर सेक्टर से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकारी क्षेत्र की दो दिग्गज वित्तीय कंपनियां पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और आरईसी लिमिटेड अब जल्द ही एक होने जा रही हैं। दोनों ही कंपनियों के बोर्ड ने इस बड़े मर्जर प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। सरकार ने पहले ही आम बजट में इस रणनीतिक विलय का एलान कर दिया था, जिसके बाद अब इस योजना को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
आरईसी का पीएफसी में विलय और शेयर रेशियो
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आरईसी लिमिटेड का विलय पूरी तरह से पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन में किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 230-232 के तहत पूरी होगी। विलय के बाद आरईसी का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और उसकी सभी संपत्तियां पीएफसी के अधीन आ जाएंगी। हालांकि, दोनों कंपनियों के बीच शेयर एक्सचेंज रेशियो यानी अदला-बदली का अनुपात अभी तय नहीं किया गया है, जिसके लिए जल्द ही वैल्यूएशन एक्सपर्ट्स की नियुक्ति की जाएगी।
सरकारी हिस्सेदारी और निवेशकों पर इसका असर
वर्तमान में पीएफसी में सरकार की हिस्सेदारी लगभग 56 फीसदी है, जबकि आरईसी में यह आंकड़ा 52.6 फीसदी के करीब है। नए विलय के बाद भी इस कंपनी का सरकारी दर्जा बरकरार रखने के लिए आवश्यकतानुसार पूंजी निवेश किया जा सकता है। इस ऐतिहासिक मर्जर को आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस एकीकरण से देश में बिजली परियोजनाओं की फाइनेंसिंग क्षमता काफी मजबूत होगी, जिससे लंबी अवधि में निवेशकों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

