बिना सोचे-समझे इन्वर्टर बैटरी में न डालें पानी! हो सकता है बड़ा ब्लास्ट, मेंटेनेंस के दौरान बरतें ये 5 सावधानियां

Lucknow News: गर्मियों के मौसम में बिजली कटौती की समस्या आज भी कई भारतीय घरों में आम है। ऐसे मुश्किल समय में इन्वर्टर घर की सबसे जरूरी और लाइफलाइन चीजों में शामिल हो जाता है। लेकिन घर में सिर्फ इन्वर्टर रखना ही काफी नहीं है, बल्कि उसकी भारी-भरकम बैटरी की सही समय पर देखभाल करना भी बेहद जरूरी होता है।

इन्वर्टर की बैटरी को लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखने और बेहतर पावर बैकअप पाने के लिए समय-समय पर उसमें पानी डालना बहुत जरूरी होता है। हालांकि, अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि बैटरी में पानी भरने का भी एक बिल्कुल सही समय और वैज्ञानिक तरीका होता है।

प्लेट्स सूखने से कम हो जाता है पावर बैकअप

अगर गलत तरीके से बैटरी में पानी डाला जाए, तो वह बहुत जल्दी खराब हो सकती है। इन्वर्टर बैटरी के अंदर एसिड और पानी का एक निश्चित इलेक्ट्रोलाइट लेवल बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। जब भी बैटरी का पानी कम होने लगता है, तो उसके अंदर मौजूद केमिकल प्लेट्स धीरे-धीरे सूखने लगती हैं।

प्लेट्स सूखने की वजह से सीधे तौर पर बैटरी की चार्जिंग क्षमता प्रभावित होती है और आपका पावर बैकअप अचानक कम होने लगता है। ऐसी स्थिति में अगर लंबे समय तक पानी का लेवल न्यूनतम स्तर से कम रहे, तो आपकी महंगी बैटरी हमेशा के लिए डेड भी हो सकती है।

भूलकर भी न इस्तेमाल करें नल या आरओ का पानी

इन्वर्टर बैटरी में कभी भी साधारण नल का पानी, कुएं का पानी या घर में इस्तेमाल होने वाला RO का पानी नहीं डालना चाहिए। इस सामान्य पानी में भारी मात्रा में मिनरल्स और आयरन मौजूद होते हैं, जो बैटरी की लीड प्लेट्स पर जमा होकर केमिकल प्रोसेसिंग को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं।

बैटरी के लिए हमेशा केवल बाजार में मिलने वाला डिस्टिल्ड वॉटर (Distilled Water) यानी पूरी तरह शुद्ध और मिनरल-मुक्त पानी ही सुरक्षित माना जाता है। गलत या अशुद्ध पानी का इस्तेमाल करने से बैटरी के सेल बहुत जल्दी सॉर्ट हो जाते हैं, जिससे उसकी कुल लाइफलाइन आधी रह जाती है।

वाटर लेवल इंडिकेटर पर हमेशा रखें पैनी नजर

बैटरी में नया पानी डालने से पहले उसका मौजूदा लेवल जरूर चेक करना चाहिए। आजकल की ज्यादातर आधुनिक बैटरियों में सामने फ्लोटिंग इंडिकेटर दिए होते हैं, जिन पर न्यूनतम (Green/Minimum) और अधिकतम (Red/Maximum) लेवल मार्क साफ दिखाई देते हैं। इससे आसानी से पता चलता है कि पानी कितना बचा है।

अगर इलेक्ट्रोलाइट लेवल न्यूनतम लाइन से नीचे चला जाए, तो बिना देरी किए तुरंत डिस्टिल्ड पानी डालना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें कि पानी कभी भी अधिकतम लाइन से ऊपर नहीं भरना चाहिए। ओवरफ्लो होने पर चार्जिंग के दौरान तेजाब बाहर उबल सकता है। सही पानी का लेवल हमेशा दोनों लाइनों के बीच होता है।

पानी डालते समय करंट और स्पार्किंग का बड़ा खतरा

बैटरी में पानी डालते समय कभी भी बड़े मुंह वाले बर्तन या जग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पानी बाहर गिर सकता है। अगर यह पानी इन्वर्टर की खुली वायरिंग या टर्मिनल्स पर चला जाए, तो भयंकर शॉर्ट-सर्किट, स्पार्किंग या यूजर को तेज करंट लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

हमेशा छोटे मुंह वाली बोतल या खास बैटरी फिलिंग कीप (Funnel) का इस्तेमाल करना ही ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा हर बैटरी निर्माता कंपनी अपने मॉडल के हिसाब से अलग मेंटेनेंस गाइडलाइन देती है। इसलिए इन्वर्टर बैटरी के इस्तेमाल से पहले कंपनी के निर्देशों को जरूर ध्यान से पढ़ें।

बैटरी का मेंटेनेंस करते समय बार-बार उसका मुख्य ढक्कन न खोलें। पानी चेक करते समय हाथों में रबर के दस्ताने और आंखों पर सुरक्षा चश्मा पहनना सबसे बेहतर माना जाता है। अगर आपकी इन्वर्टर बैटरी चार्जिंग के दौरान जरूरत से ज्यादा गर्म हो रही है, तो तुरंत किसी ऑथराइज्ड एक्सपर्ट को बुलाकर उसकी जांच करवाएं।

Author: Mohit

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