Bihar News: बिहार के जहानाबाद में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। भारी पुलिस बल एक खूंखार नक्सली की प्रतिमा तोड़ने पहुंचा था। प्रशासन ने कार्रवाई शुरू ही की थी कि अचानक एक रहस्यमयी फोन कॉल आया। इस कॉल ने पूरा खेल पलट दिया और पुलिस को तुरंत उलटे पांव वापस लौटना पड़ा। यह घटना सिकरिया थाना के शुकुलचक गांव की है। अब इस फोन कॉल को लेकर पूरे इलाके में बड़ी चर्चा हो रही है।
मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल की अचानक छापेमारी
रविवार को सुकुलचक गांव में उस समय अफरातफरी मच गई जब पुलिस वहां पहुंची। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में भारी पुलिस बल गांव में दाखिल हुआ था। उनका मकसद दिवंगत नक्सली नेता देवकुमार उर्फ अरविंद की प्रतिमा को हटाना था। पुलिस ने प्रतिमा तोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। लेकिन तभी किसी बड़े अधिकारी का फोन आ गया। फोन पर मिले निर्देश के बाद पूरी कार्रवाई रोक दी गई। पुलिस को बैरंग ही वापस जाना पड़ा।
एक करोड़ का इनामी था कुख्यात नक्सली देवकुमार
यह प्रतिमा कोई साधारण व्यक्ति की नहीं थी। देवकुमार उर्फ अरविंद एक खूंखार नक्सली था। उसके खिलाफ कई राज्यों में दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। झारखंड और छत्तीसगढ़ में उसका सबसे ज्यादा खौफ था। सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये का बड़ा इनाम घोषित किया था। मार्च दो हजार अठारह में झारखंड के जंगलों में बीमारी से उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद उसके परिजनों ने अपनी निजी जमीन पर यह प्रतिमा बनवाई थी।
प्रशासन की चुप्पी और भड़के ग्रामीणों का बड़ा दावा
अचानक हुई पुलिस की इस कार्रवाई से गांव वालों में काफी गुस्सा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह प्रतिमा उनकी निजी जमीन पर बनाई गई है। हर साल देवकुमार की पुण्यतिथि पर लोग यहां आकर श्रद्धांजलि देते हैं। वहीं इस पूरे मामले पर प्रशासन ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह रहस्यमयी फोन कॉल किसका था।


