Colombo News: श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के गलियारों में बुधवार को उस समय भूचाल आ गया जब लंबे समय से बोर्ड पर काबिज अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। शम्मी सिल्वा के साथ बोर्ड की पूरी कार्यकारी समिति ने भी सामूहिक रूप से पद छोड़ दिया है। इस बड़े उलटफेर की मुख्य वजह देश के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके द्वारा बोर्ड के कामकाज में बदलाव के लिए डाला गया भारी दबाव माना जा रहा है। बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर इस इस्तीफे की पुष्टि की है।
राष्ट्रपति के कड़े रुख के बाद बोर्ड ने घुटने टेके
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके पिछले कुछ समय से क्रिकेट बोर्ड में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन को लेकर सख्त नजर आ रहे थे। राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से बोर्ड में नए प्रशासन की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी दबाव के बीच शम्मी सिल्वा ने एक विशेष बैठक बुलाई और अपने कार्यकाल के 11 महीने शेष रहते ही पद छोड़ने का फैसला किया। यह कदम श्रीलंका क्रिकेट में एक नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
सामूहिक इस्तीफे से क्रिकेट प्रशासन में मची खलबली
श्रीलंका क्रिकेट द्वारा जारी औपचारिक बयान के अनुसार, अध्यक्ष के साथ-साथ कार्यकारी समिति के सभी पदाधिकारियों ने भी अपने पद त्याग दिए हैं। इस निर्णय की जानकारी राष्ट्रपति दिसानायके और खेल मंत्री सुनील कुमारा गमागे को लिखित रूप में दे दी गई है। 28 अप्रैल को हुई एग्जीक्यूटिव कमिटी की महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया था कि बोर्ड को चलाने के लिए अब एक अंतरिम बॉडी को रास्ता देना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
एरन विक्रमरत्ने संभाल सकते हैं अंतरिम कमान
बोर्ड के इस सामूहिक इस्तीफे के बाद अब श्रीलंका सरकार जल्द ही एक अंतरिम कमेटी का गठन कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व सांसद और निवेश बैंकर एरन विक्रमरत्ने को इस नई अंतरिम कमेटी का प्रमुख बनाया जा सकता है। इसके अलावा, खेल में सुधारों को गति देने के लिए पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सिदाथ वेट्टीमुनी और रोशन महानामा को भी नए प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इन नामों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।
आईसीसी की कार्रवाई का मंडरा रहा है खतरा
श्रीलंका क्रिकेट में सरकार के इस सीधे हस्तक्षेप के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की कार्रवाई का डर सताने लगा है। याद रहे कि नवंबर 2023 में भी राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण आईसीसी ने श्रीलंका की सदस्यता निलंबित कर दी थी। हालांकि जनवरी 2024 में निलंबन हटा लिया गया था, लेकिन अब फिर से सरकार के इशारे पर पूरे बोर्ड का इस्तीफा दिलवाना आईसीसी के नियमों के खिलाफ जा सकता है। क्रिकेट प्रशंसक अब वैश्विक संस्था के अगले कदम पर नजरें टिकाए हुए हैं।
खराब प्रदर्शन और भ्रष्टाचार के आरोपों ने घेरा
शम्मी सिल्वा के नेतृत्व में श्रीलंका क्रिकेट ने एशिया कप जैसे खिताब तो जीते, लेकिन विश्व स्तर पर टीम का प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। हाल ही में फरवरी-मार्च 2026 में हुए टी20 विश्व कप में टीम के जल्दी बाहर होने से जनता में भारी नाराजगी थी। इसके साथ ही बोर्ड पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप भी लग रहे थे। राष्ट्रपति दिसानायके ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी, जिसे अंततः बोर्ड को स्वीकार करना पड़ा।
सात साल के लंबे कार्यकाल का हुआ अंत
शम्मी सिल्वा पहली बार 2019 में श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष चुने गए थे और इसके बाद उन्होंने लगातार चार बार निर्विरोध चुनाव जीतकर बोर्ड पर अपनी पकड़ मजबूत रखी थी। उनके सात साल के कार्यकाल में श्रीलंका की पुरुष और महिला टीमों ने कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन विवादों ने कभी उनका पीछा नहीं छोड़ा। अब उनके इस्तीफे के साथ ही श्रीलंका के सबसे अमीर खेल निकाय में चल रहा एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया है और एक अनिश्चित भविष्य की शुरुआत हुई है।


