MS University: ‘धक-धक’ गाने पर छात्रा के डांस ने मचाया बवाल, भावुक होकर बोलीं- मेरी जिंदगी तमाशा बन गई

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Gujarat News: वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। यहां आर्ट्स फैकल्टी के सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्रा के डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। छात्रा ने ‘धक-धक करने लगा’ गाने पर नृत्य किया था। इस साधारण से डांस वीडियो ने अब भारी राजनीतिक रंग ले लिया है। एबीवीपी और एनएसयूआई जैसे छात्र संगठन इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। छात्रा वर्तमान में बहुत भारी मानसिक तनाव का सामना कर रही है।

बिना अनुमति वीडियो वायरल होने पर छलका दर्द

वीडियो के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद पीड़ित छात्रा ने भावुक वीडियो जारी किया है। छात्रा ने स्पष्ट किया कि उसने अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए एक साधारण साड़ी में डांस किया था। उसने स्वीकार किया कि शायद गाने का चुनाव पूरी तरह सही नहीं था। लेकिन किसी ने उसकी अनुमति के बिना यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। छात्रा ने कहा कि इस विवाद के कारण वह बहुत गहरे मानसिक दबाव से गुजर रही है।

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राजनीतिक दलों से छात्रा का कोई सीधा संबंध नहीं

पीड़ित छात्रा ने अपने बयान में दोनों छात्र संगठनों से दूरी बनाई है। उसने स्पष्ट रूप से बताया कि वह ना तो एबीवीपी से जुड़ी है और ना ही एनएसयूआई के किसी सदस्य को जानती है। अगर उसे अंदाजा होता कि इस डांस पर इतना बड़ा विवाद हो जाएगा, तो वह कभी मंच पर नहीं जाती। छात्रा ने आम लोगों से अपील की है कि किसी का वीडियो शेयर करने से पहले उसके गंभीर परिणामों पर जरूर विचार करें।

एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच तेज हुई राजनीति

एमएस यूनिवर्सिटी में यह कार्यक्रम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने आयोजित किया था। डांस का वीडियो आते ही कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस प्रदर्शन को अभद्र और भारतीय संस्कारों के बिल्कुल खिलाफ बताया। इसके जवाब में एबीवीपी नेता समर्थ भट्ट ने एनएसयूआई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष एक महिला के निजी वीडियो का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है। मामले ने बहुत तूल पकड़ लिया है।

कला और संस्कारों की आड़ में छिड़ा बड़ा संग्राम

यह घटना सोशल मीडिया के खतरनाक और अनियंत्रित प्रभाव को साफ तौर पर दर्शाती है। बॉलीवुड गानों पर डांस करना कॉलेज के कार्यक्रमों में बहुत आम बात है। लेकिन इस बार एक छात्रा की व्यक्तिगत पसंद को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया गया है। एक तरफ पीड़ित छात्रा अपनी मानसिक शांति वापस पाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रही है। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपनी सुविधा के अनुसार भुनाने में पूरी तरह से लगे हुए हैं।

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