बोरवेल का वो नन्हा ‘प्रिंस’ अब क्या कर रहा है? 20 साल बाद सामने आई ‘ट्यूबवेल बॉय’ की चौंकाने वाली तस्वीर

Haryana News: करीब दो दशक पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आई एक खबर ने पूरे हिंदुस्तान की धड़कनें रोक दी थीं। साल 2006 में 4 साल का मासूम प्रिंस 60 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उस वक्त टीवी स्क्रीनों पर चले 50 घंटे के लाइव रेस्क्यू ऑपरेशन को शायद ही कोई भूल पाया हो। आज वही ‘ट्यूबवेल बॉय’ 24 साल का गबरू जवान हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि जिस प्रिंस को कभी लोहे के पाइपों के सहारे मौत के मुंह से निकाला गया था, आज वही प्रिंस पाइपों के जरिए ही अपनी तकदीर संवार रहा है।

चूहे को पकड़ने की शरारत और वो 60 फीट गहरा अंधेरा

प्रिंस की यादों में वह खौफनाक मंजर आज भी पूरी तरह धुंधला नहीं हुआ है। उस दिन वह अपने दोस्त अंगरेज के साथ खेल रहा था। इसी बीच उनकी नजर एक चूहे पर पड़ी और वे उसके पीछे भागने लगे। वह चूहा एक बोरवेल में जा घुसा जिस पर बोरी ढकी थी। मासूमियत में प्रिंस उस बोरी पर कूदा और वह फट गई। प्रिंस सीधे 60 फीट नीचे जा गिरा। वहां से शुरू हुई मौत और जिंदगी के बीच की वह जंग जिसने पूरे देश को एक कर दिया था।

सेना का जांबाज ऑपरेशन और 50 घंटे की वो खौफनाक जंग

बोरवेल के भीतर प्रिंस ने मौत को बहुत करीब से देखा था। ऊपर से आती माता-पिता की आवाजें ही उसकी एकमात्र उम्मीद थीं। बचाव के शुरुआती प्रयास जब पूरी तरह विफल रहे, तब भारतीय सेना ने कमान संभाली। सेना ने बोरवेल के समानांतर एक गहरा गड्ढा खोदा और पाइप के जरिए रास्ता बनाकर प्रिंस को सुरक्षित बाहर निकाला। यह ऑपरेशन भारत के इतिहास में दुआओं और जांबाजी का एक बड़ा प्रतीक बन गया था। उस वक्त हर मंदिर और मस्जिद में प्रिंस के लिए प्रार्थनाएं हुई थीं।

अब पाइप और औजारों के जरिए भविष्य की नई तलाश

वक्त का पहिया घूमा और वही प्रिंस अब पाइपों की बारीकियों को समझकर अपना घर चला रहा है। उसने आईटीआई (ITI) से प्लंबिंग का पेशेवर कोर्स पूरा कर लिया है। प्रिंस का असली सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। इसके लिए उसने अपनी फिटनेस पर कड़ी मेहनत भी की, लेकिन कम कद की तकनीकी बाधा के कारण वह वर्दी नहीं पहन सका। सेना में न जा पाने के गम ने उसे तोड़ा नहीं, बल्कि और ज्यादा मजबूत बना दिया।

स्थायी नौकरी की उम्मीद और संघर्ष की नई मिसाल

आज प्रिंस पूरी तरह से सकारात्मक है और अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है। प्लंबर के रूप में काम करते हुए वह अब एक ऐसी नौकरी की तलाश में है जो उसके जीवन को आर्थिक स्थिरता दे सके। बोरवेल के उस अंधेरे ने उसे सिखाया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। प्रिंस का यह संघर्ष उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो मुश्किल हालातों से लड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं। वह अब अपने हुनर के दम पर पहचान बना रहा है।

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