Jharkhand News: झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) में पदों की नियुक्ति को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने निगम के सीएमडी को ज्ञापन सौंपकर प्रशासनिक पदों पर तकनीकी अधिकारियों की तैनाती का कड़ा विरोध किया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि ह्यूमन रिसोर्स और प्रशासन जैसे संवेदनशील विभागों में नियमों की अनदेखी की जा रही है। श्रमिक संघ ने इस कार्यशैली को निगम के स्थायी आदेश संख्या-804 और सर्विस रूल्स का खुला उल्लंघन करार दिया है।
तकनीकी अफसरों की प्रशासनिक कुर्सी पर तैनाती से बढ़ा तनाव
संघ ने सीएमडी को सौंपे ज्ञापन में अभिषेक कुमार, कुमार संभव, राजेश कुमार पांडे और प्रदीप कुमार शर्मा के नामों का स्पष्ट उल्लेख किया है। अजय राय का कहना है कि तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों को प्रशासनिक पदों पर बैठाने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि इससे रेड टेपिज्म और पक्षपातपूर्ण फैसलों को बढ़ावा मिल रहा है। कर्मचारियों के बीच बढ़ते भेदभाव और प्रशासनिक निष्क्रियता ने निगम के भीतर असंतोष पैदा कर दिया है, जिसे तुरंत ठीक करने की मांग की गई है।
डेस्टिनेशन मैपिंग और प्रमोशन के खेल पर उठे सवाल
श्रमिक संघ ने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड के चार कंपनियों में विभाजन के बाद कर्मचारियों के फाइनल अलॉटमेंट को जानबूझकर विवादित रखा गया। संघ के अनुसार, यह सब मनमाने तरीके से प्रमोशन और पसंदीदा पोस्टिंग पाने के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर और डेस्टिनेशन मैपिंग को सही ढंग से लागू नहीं किया गया। इसके अलावा, 64 अतिरिक्त तकनीकी पदों को बिना ठोस आधार के स्वीकृति दी गई, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति पर भारी बोझ पड़ा है।
पावर प्रोडक्शन शून्य होने को बताया एडमिनिस्ट्रेटिव फेल्योर
संघ ने सिकिदरी हाइडल प्रोजेक्ट की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई है। ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान इस प्रोजेक्ट में बिजली उत्पादन शून्य रहा है, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। अजय राय ने मांग की है कि एचआर और एडमिनिस्ट्रेशन जैसे पदों पर केवल योग्य और विशेषज्ञ प्रशासनिक अधिकारियों की ही नियुक्ति की जानी चाहिए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों के विरुद्ध की गई पोस्टिंग को जल्द नहीं बदला गया, तो वे आंदोलन की राह अपनाएंगे।

