Hawala Network Case: दुबई कनेक्शन और डिलीट डेटा का रहस्य, क्या पुलिस खोल पाएगी अरबों के काले कारोबार का राज?

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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की बारादरी पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय हवाला गिरोह के एक और शातिर सदस्य मोईन को सोमवार देर शाम धर दबोचा। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह केवल बैंक खातों से भारी नकदी निकालने का काम करता था। पुलिस अब इस काले नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

इससे पहले पुलिस ने रविवार रात पैंतीस लाख रुपये कैश के साथ जमीर अहमद और जगदीश चोटिया को गिरफ्तार किया था। आरोपी जमीर ने खुलासा किया कि वह जरी के काम की आड़ में दुबई में बैठे एक संदिग्ध मास्टरमाइंड जीशान अली के इशारे पर हवाला का कारोबार चला रहा था।

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दुबई के मास्टरमाइंड ने दिया था पंद्रह प्रतिशत भारी कमीशन का लालच

आरोपी जमीर अहमद ने बताया कि साल दो हजार बीस में सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी मुलाकात जीशान अली से हुई थी। जीशान ने खुद को दुबई का निवासी बताया था। उसने एक फर्जी फर्म का बैंक खाता खोलने पर पंद्रह प्रतिशत कमीशन का बड़ा लालच दिया था।

इसके बाद गिरोह ने केजीएन नाम से अपनी फर्म का बैंक अकाउंट खोला और उसमें देश-विदेश से मोटी रकमें मंगाने लगे। बाद में दिल्ली के चांदनी चौक निवासी धम्माराम और लालचंद्र के कहने पर स्थानीय आरोपी जगदीश चोटिया को भी पैसों की डिलीवरी के लिए इस नेटवर्क में शामिल किया गया।

आरोपियों ने डिलीट किया मोबाइल डेटा और फॉरेंसिक लैब पहुंची पुलिस

पकड़े जाने के डर से मुख्य आरोपियों ने अपने स्मार्टफोन का पूरा डेटा पूरी तरह डिलीट कर दिया था। पुलिस को आशंका है कि नष्ट किए गए डेटा में कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत छिपे हो सकते हैं। पुलिस ने मोबाइल को फॉरेंसिक लैब जांच के लिए भेज दिया है।

इसके साथ ही पुलिस आरोपियों के फोन का इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। इससे यह साफ हो जाएगा कि आरोपी वॉट्सऐप कॉल के जरिए किन-किन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों के संपर्क में थे। इस तकनीकी जांच से दुबई के जीशान के बारे में भी ठोस सुराग मिल सकते हैं।

कैश डिपॉजिट मशीनों का पैटर्न खोलेगा अवैध फंडिंग का असली राज

जांच एजेंसी अब उन कैश डिपॉजिट मशीनों की लोकेशन ट्रैक कर रही है, जहां से इस खाते में रुपये जमा किए जाते थे। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या पैसे एक ही बैंक की मशीनों से जमा हुए या अलग-अलग राज्यों के क्षेत्रों से भेजे गए।

इस खास वित्तीय पैटर्न को समझने से पुलिस को यह जानने में मदद मिलेगी कि आखिर यह बेहिसाबी नकदी कहां से आ रही थी। पुलिस की एक विशेष टीम उन संदिग्ध इलाकों और वहां सक्रिय लोगों की जानकारी जुटा रही है, जहां से यह फंडिंग ऑपरेट हो रही थी।

Author: Raj Thakur

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