पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग: आम आदमी की जेब पर गिरा महंगाई का बड़ा बम, चेक करें अपने शहर के नए रेट

New Delhi News: देश की आम जनता के लिए शुक्रवार की सुबह महंगाई का बड़ा झटका लेकर आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। दिल्ली समेत देशभर के प्रमुख महानगरों में आज से नए दाम प्रभावी हो गए हैं। इस फैसले के बाद राजधानी में पेट्रोल अब 97.91 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है।

देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के नए दाम

देश के अलग-अलग हिस्सों में ईंधन की कीमतों में आज से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत अब 106.54 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि कोलकाता में यह 108.94 रुपये तक पहुंच चुकी है। दक्षिण भारत के चेन्नई और बेंगलुरु में भी वाहन मालिकों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। नोएडा और जयपुर जैसे शहरों में भी कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई और दैनिक परिवहन पर सीधा असर पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में भी हुआ बड़ा इजाफा

सामान्य ईंधन के साथ-साथ प्रीमियम पेट्रोल के शौकीनों को भी अब अधिक भुगतान करना होगा। पहले प्रीमियम पेट्रोल की दरें 102 से 104 रुपये प्रति लीटर के बीच चल रही थीं, जो अब बढ़कर 107.14 रुपये तक पहुंच गई हैं। तेल कंपनियों ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थिरता के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। इस मूल्य वृद्धि का सीधा बोझ मध्यम वर्ग के बजट और घरेलू खर्चों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

आखिर क्यों बढ़ानी पड़ी पेट्रोल और डीजल की कीमतें

पेट्रोल और डीजल के दामों में इस अचानक वृद्धि के पीछे वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य जिम्मेदार हैं। पश्चिम एशिया में ईरान के आसपास बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई चैन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारतीय तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का असर सीधा घरेलू बाजार पर पड़ता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स और आरबीआई गवर्नर की बड़ी चेतावनी

मार्केट एक्सपर्ट अरविंद घोष के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां अब तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ खुद उठा रही थीं। हालांकि, लंबे समय तक घाटा सहना संभव नहीं था, जिसके चलते कीमतों में सुधार किया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी पहले ही संकेत दिए थे कि पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने पर दाम बढ़ सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और तेल कंपनियों के बढ़ते वित्तीय घाटे ने सरकार को चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है।

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