New Delhi News: कांग्रेस पार्टी ने भारत के चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग पूरी तरह से पक्षपाती हो चुका है। इससे देश के आम नागरिकों का वोट देने का अधिकार भारी खतरे में पड़ गया है। कांग्रेस ने अब मांग उठाई है कि मताधिकार को वैधानिक अधिकार की जगह तुरंत मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए। ऐसा होने पर कोई भी नागरिक अपने अधिकार के लिए सीधे अदालत जा सकेगा। पार्टी का कहना है कि ऐसा पक्षपाती रवैया पहले कभी नहीं दिखा।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे गंभीर आरोप
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा और बड़ा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग चुनावों में एक निष्पक्ष अंपायर की भूमिका निभाने में पूरी तरह से विफल रहा है। इसके बजाय वह सत्ताधारी दल के साथी खिलाड़ी की तरह ही काम कर रहा है। रमेश ने दावा किया कि एसआईआर के जरिए एक बड़ी साजिश के तहत लगातार कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार का नेतृत्व पूरी तरह से समझौतावादी है।
अमित शाह के तीन ‘डी’ फॉर्मूले पर सवाल
जयराम रमेश ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुराने बयान का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गृहमंत्री ने तीन ‘डी’ का लक्ष्य निर्धारित किया था। इन तीन डी का अर्थ डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना था। कांग्रेस नेता ने सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब मांगा है। पार्टी जानना चाहती है कि अब तक कितने गैर-भारतीय नागरिकों की पहचान हुई है। इसके अलावा कितनों के नाम काटे गए और कितने बाहर निकाले गए हैं।
महाभियोग प्रस्ताव और पार्टी का अगला कदम
कांग्रेस अपने शासनकाल में यह बदलाव क्यों नहीं कर सकी, इस सवाल पर रमेश ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले किसी ने चुनाव आयोग के इस स्तर तक गिरने की कल्पना नहीं की थी। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पेश दूसरे महाभियोग प्रस्ताव को उन्होंने पूरी तरह से सही ठहराया है। जयराम रमेश ने साफ कहा कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रयास जारी रखेगा। उनका स्पष्ट मानना है कि वर्तमान आयुक्त पूरी तरह से समझौतावादी बन चुके हैं।


