India News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान युद्ध को लेकर जारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ी कूटनीतिक हलचल हुई है। अमेरिका द्वारा समर्थित प्रस्ताव पर रूस और चीन ने अपने ‘विटो’ पावर का इस्तेमाल कर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। यह प्रस्ताव ईरान पर कड़े प्रतिबंधों और सैन्य दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा था। रूस और चीन के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान को अलग-थलग करने के किसी भी एकतरफा प्रयास का पुरजोर विरोध करेंगे।
अमेरिका के कड़े रुख को लगा बड़ा कूटनीतिक झटका
सुरक्षा परिषद में हुई इस वोटिंग के बाद वाशिंगटन की रणनीतियों को एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका लगा है। अमेरिका चाहता था कि परिषद ईरान के खिलाफ एक सुर में कड़ा निंदा प्रस्ताव पारित करे। अमेरिकी राजदूत ने दलील दी थी कि ईरान की गतिविधियां पूरे मध्य पूर्व की शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। लेकिन रूस और चीन ने अमेरिका पर ही आरोप लगाया कि वह कूटनीति के बजाय सैन्य विकल्प को उकसावा दे रहा है।
चीन ने बताया अमेरिकी प्रस्ताव को पूरी तरह असंतुलित
चीन के प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद में अपने विटो के पक्ष में बहुत ही स्पष्ट और कड़ा तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पूरी तरह से असंतुलित और पूर्वाग्रह से ग्रसित था। चीन का मानना है कि ऐसे एकतरफा प्रस्तावों से बातचीत की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। चीनी विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि वे किसी भी देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रस्तावों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
रूस ने दी युद्ध के प्रति गंभीर अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
रूस ने इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक चेतावनी दी है। रूसी राजदूत ने कहा कि अमेरिका इस समय दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है। रूस का साफ कहना है कि ईरान पर दबाव बनाने के बजाय शांतिपूर्ण संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। क्रेमलिन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को रोकने के लिए अपनी हर मुमकिन ताकत का इस्तेमाल करेंगे।
सुरक्षा परिषद में बढ़ रहा है महाशक्तियों का भारी टकराव
इस विटो के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महाशक्तियों के बीच का आपसी टकराव अब और भी ज्यादा खुलकर सामने आ गया है। अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस एक तरफ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं रूस और चीन ने दूसरी तरफ अपनी मजबूत मोर्चाबंदी कर ली है। इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच ईरान युद्ध का संकट और भी अधिक गहराने लगा है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस विटो के बाद अपना अगला कदम क्या उठाता है।

