Boston News: अंतरिक्ष के सफर का सपना देखने वाले पहले सिख व्यक्ति ने 80 साल की उम्र में विंग वॉकिंग कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस उम्र में जहां लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं उन्होंने आसमान में बहादुरी की नई मिसाल पेश की है। उनका यह साहसी कदम युवाओं को प्रेरित कर रहा है।
मुश्किलों को मात देकर एनडीए से बिजनेस टायकून तक का सफर
मूल रूप से जालंधर के रहने वाले और अब अमेरिकी नागरिक बहल के लिए रोमांच हमेशा से जिंदगी का हिस्सा रहा है। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी के 28वें कोर्स के छात्र थे। लेकिन महज 17 साल की उम्र में दाहिने कान से सुनाई न देने के कारण उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर एकेडमी छोड़नी पड़ी थी।
इस शारीरिक कमजोरी को उन्होंने कभी अपनी कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया। एनडीए छोड़ने के बाद उन्होंने दार्जिलिंग के चाय बागानों में मैनेजर के रूप में काम किया। इसके बाद साल 1975 में वे अमेरिका चले गए। वहां उन्होंने कड़ा संघर्ष कर एक सफल बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया और बोस्टन को अपना आशियाना बनाया।
बचपन के जुनून ने 80 की उम्र में भी नहीं छोड़ा साथ
इस पूरे सफर में उड़ान भरने का उनका बचपन का जुनून कभी कम नहीं हुआ। कॉलेज और एनसीसी कैडेट के दिनों में उन्होंने आगरा में ग्लाइडर पायलट का लाइसेंस हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में भी कमर्शियल और प्राइवेट पायलट का लाइसेंस प्राप्त कर आसमान में अपनी धाक जमाई।
इतना ही नहीं, जब कोविड महामारी के दौरान पूरी दुनिया थमी हुई थी, तब बहल ने हेलीकॉप्टर पायलट का लाइसेंस भी हासिल कर लिया। बहल गर्व से कहते हैं कि उड़ना हमेशा से उनका सबसे बड़ा सपना रहा है और वे बचपन से ही बादलों के पार जाना चाहते थे।
हवा में 600 फीट की ऊंचाई पर कैसे की विंग वॉकिंग?
उनके इस नए एडवेंचर की शुरुआत उज्बेकिस्तान में एक ट्रैवलर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी। वहां एक ब्रिटिश महिला से बातचीत के दौरान उन्हें विंग वॉकिंग का विचार आया। बाद में केंट में आयोजित एक इवेंट में पैनिक अटैक के कारण वह महिला तो पीछे हट गई, लेकिन बहल ने कदम नहीं खींचे।
उन्होंने एक पुराने विमान के विंग पर बंधकर करीब 600 फीट की ऊंचाई पर तेज हवाओं का सामना किया। एक सिख होने के नाते हवा के भारी दबाव से बचने के लिए उन्होंने अपनी पगड़ी को रबर बैंड से बांधा था। वे कहते हैं कि बादलों के बीच हाथ फैलाकर उन्हें बेहद सुकून मिला।
‘डर ही मुझे सबसे ज्यादा जिंदा रखता है’
दुनिया के हर देश की यात्रा कर चुके बहल अपनी यात्राओं को ‘टायरलेस ट्रैवलर’ नामक किताब में समेट चुके हैं। अब उनकी दूसरी किताब ‘माई प्लैनेट, माई प्लेग्राउंड’ पर काम चल रहा है। वे कहते हैं कि डर ही उन्हें सबसे ज्यादा जिंदा रखता है और वे हर नए एडवेंचर के लिए तैयार हैं।
Author: Pallavi Sharma
