बागवानों का दर्द मंत्री ने जब समझा- राम भगत नेगी

बागवानों क्यों मेहनत करते हो
बागवानों क्यों पेटियां में सेब भरते हो
बागवानों क्यों सेब की ग्रेडिंग करते हो
बागवानों क्यों फालतू खर्चा करते हो

बागवानों का दर्द को मंत्री ने जब समझा
ऐसा लगा मंत्री के आंखो से आंसू आने वाले है
मंत्री के सहानुभूति से थोड़ी देर के लिए
मेरा दिल को भी सुकून मिला
ऐसा लगा ऐसे मंत्री पाकर हम धन्य हुए है

जैसे ही मंत्री ने अगला शब्द कहा
बागवानों फिजूल खर्चा ना करो
अपने सेब को खुले बाजार में बेचो
ना पेटी का खर्चा ना ग्रेडिंग का खर्चा
आम का आम गुठली के दाम

मैं थोड़ी देर सोच में पड़ा
मंत्री महोदय की बातों दम है
फिजूल खर्चा हम करें क्यों
गत्ता पेटी ले क्यों
हर साल इसके रेट बढ़ते
सेब के रटे तो कभी ना बढ़ते

मंत्री के बातों में दम था
इशारा अडानी की ओर था
खुला बाजार अडानी ही था
खुले बेचे कहां बस वो बोलना भूल गया था
अडानी को माल दो रुपए मिले या ना मिले
पैसा तो मिलेगा पेटी गेर्डिन्ग का
खर्चा तो बचेगा
सच मंत्री के बातों में दम था
उसके आंखो में हमारे लिए आंसू था

हम धन्य है ऐसे मंत्री पा कर
जल्दी ही हम अब खर्चों से बचेंगे
हमारा पेट पले या ना पले
ऐसे मंत्रियो के घर रोज भरेंगे

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