पैसा – कविता, राम भगत नेगी

इन्सान का फितरत है पैसा
इन्सान का ईमान है पैसा
मेहनत का फल है पैसा
सुख शांति का द्वार है पैसा

अपनों का प्यार है पैसा
घर-संसार है पैसा
जब तक मूल्य है तब तक पैसा
आज मूल्य ख़त्म तो कैसा पैसा

देश बदल रहा है
पैसा बदल रहा है
ईमान बदल रहा है
सम्मान बदल रहा है

आज कष्ट है पैसा
आज ATM का लाईन है पैसा
आज लाइनों में सम्बंध है पैसा
कैश और चेक है पैसा

आज ईमानदारी है पैसा
कल तक बईमानों का
काला धन था पैसा
इन्सान की फितरत है पैसा
इन्सान का ईमान है पैसा

पैसा है तो घर है
लाज शर्म का सर है
पैसा है तो देश-विदेश
पैसा है तो सुंदर गृह परिवेश

नोट बंदी के इस दौर में
वक्त ने सब सीखाया था
2000 के नोटो ने 10 के
सिक्कों से भी मिलवाया था
ये है पैसा कैसा है ये पैसा

-राम भगत, नेगी किन्नौर, हिमाचल प्रदेश
लेखक राम भगत नेगी मूलतः हिमाचल प्रदेश के किन्नौर के रहने वाले है और उनकी शिक्षा 10 तक हुई है। वर्तमान में डीजे और टेंट का व्यवसाय करते है और विद्युत विभाग के ठेकेदार है। साथ में लेखक समाज सेवा भी करते है। लेखक गिरिराज, वर्तमान अंकुर, गंगा खबर, दक्षिण प्रतीक्षा समाचार आदि छप चुके है। राष्ट्रीय कवि संगम हिमाचल प्रदेश किन्नौर इकाई के अध्यक्ष है।

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