इस देश के 70 हजार से ज्यादा लोग उतरे सड़कों पर, सरकार को 25 सितंबर तक दिया इस्तीफा देने का अल्टीमेटम

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प्राग: श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बाद अब एक और देश भीषण आर्थिक संकट की भेंट चढ़ गया है और हजारों प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

ये देश है चेक रिपब्लिक, जहां करीब 70 हजार से ज्यादा लोग सड़क पर उतर आए हैं और सरकार से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। डीडब्ल्यू न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी पराग में हजारों लोग इकट्ठा हो गये हैं और प्रदर्शनकारियों ने सरकार को 25 सितंबर तक इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दे दिया है।

सरकार को अल्टीमेटम

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन में प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ समूह लोकलुभावन प्रवासी-विरोधी स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष लोकतंत्र पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक हैं। ”चेक रिपब्लिक फर्स्ट” में ये विरोध प्रदर्शन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, कोविड -19 टीकाकरण और अप्रवासियों की वजह से देश में बढ़ती मुद्रास्फीति को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा कंजर्वेटिव सरकार और प्रधानमंत्री पेट्र फिआला के नेतृत्व वाली मौजूदा गठबंधन वाली सरकार के इस्तीफे की मांग की है, जिसने पिछले दिसंबर में ही पदभार ग्रहण किया था।

यूक्रेन नीति के लिए आलोचना

यूक्रेन नीति को लेकर प्रदर्शनकारियों ने सरकार की खिंचाई की है। प्रदर्शन के आयोजकों ने कहा कि, चेक गणराज्य को सैन्य रूप से तटस्थ होना चाहिए और रूस सहित गैस आपूर्तिकर्ताओं के साथ सीधे अनुबंध सुनिश्चित करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यूक्रेन में युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करने के लिए सरकार की निंदा की और आरोप लगाया कि वह ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से निपटने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि, सरकार अपने नागरिकों की तुलना में युद्धग्रस्त यूक्रेन पर अधिक ध्यान दे रही है। वहीं, प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बैनर था, जिसपर लिखा था कि, “यूक्रेनी के लिए सबसे अच्छा सामान और हमारे लिए सिर्फ दो स्वेटर।” प्रदर्शनकारियों के लिए आसय सर्दी के महीने में रूस से गैस खरीदने की कमी करने पर सरकार की आलोचना की गई थी। चेक गणराज्य, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की अध्यक्षता कर रहा है, उसने यूक्रेन से लगभग 400,000 शरणार्थियों को अपने देश में शरण दिया है और युद्धग्रस्त देश को महत्वपूर्ण सैन्य और मानवीय सहायता प्रदान की है, जिसके खिलाफ भी लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है।

फियाला ने रूसी प्रोपेगेंडा पर दी चेतावनी

प्राग में रैली के एक दिन बाद सरकार के अविश्वास मत से बचने के बाद विपक्ष ने दावा किया कि, सरकार मुद्रास्फीति और ऊर्जा की कीमतों पर कार्रवाई नहीं कर पा रही है। वहीं, केंद्र सरकार, जो दक्षिणपंथी पांच-पक्षीय गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, उसके प्रधानमंत्री पेट्र फियाला ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के दिल में देश के सर्वोत्तम हित नहीं हैं। फियाला ने कहा, “वेंसेस्लास स्क्वायर पर विरोध उन ताकतों द्वारा बुलाया गया था जो रूस समर्थक हैं और चरम पदों के करीब हैं और चेक गणराज्य के हितों के खिलाफ हैं।” उन्होंने कहा कि, “यह स्पष्ट है कि रूसी प्रचार और दुष्प्रचार अभियान हमारे क्षेत्र में मौजूद हैं और कुछ लोग बस उन्हें सुनते हैं।” ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण खोजने के लिए चेक सरकार अगले सप्ताह यूरोपीय संघ के देशों की एक आपातकालीन बैठक बुलाने की योजना बना रही है।

श्रीलंका और पाकिस्तान पहले से परेशान

आपको बता दें कि, चेक गणराज्य और ब्रिटेन फिलहाल दो ऐसे यूरोपीय देश हैं, जो बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि दो एशियाई देश श्रीलंका और पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। श्रीलंका इस साल की शुरूआत से ही ऊर्जा संकट, दवा संकट और खाद्य संकट से परेशान है और प्रदर्शन की वजह से देश के राष्ट्रपति गोतबाटा राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। वहीं, पाकिस्तान को बचाने के लिए आईएमएफ ने पैकेज का ऐलान किया है। इसके अलावा आज भारत में भी कांग्रेस पार्टी महंगाई के खिलाफ नई दिल्ली स्थिति रामलीला मैदान में प्रदर्शन कर रही है।

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