चीन में कोरोना बेकाबू, दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट हुआकियांगबेई को बंद करने पर हुआ मजबूर

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RIGHT NEWS INDIA: कोरोना फैलाने की इतनी बड़ी कीमत चीन को चुकानी होगी यह ड्रैगन ने कभी नहीं सोचा होगा। जब साल 2020 में कोरोना का कहर बरसा तो उससे चीन अछूता रह गया लेकिन अब ज्यों-ज्यों बाकी दुनिया इससे उबर रहे हैं, चीन इससे और बुरी तरह घिरता जा रहा है।

चीन में हालात ऐसे हो चुके हैं कि सरकार को दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट हुआकियांगबेई को बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है।

चीन के दक्षिणी शहर शेनझेन में स्थित इलेक्ट्रॉनिक चीजों की थोक खरीद के लिए लोकप्रिय यह बाजार चार दिनों तक बंद रहेगा। इसके साथ ही चीन ने कई अन्य इलाकों में लॉकडाउन लगाने के साथ 24 मेट्रो स्टेशनों की सेवा को भी बंद कर दिया है। हुआकियांगबेई इलेक्ट्रिक बाजार का एक क्षेत्र है जहां तीन विशाल बिल्डिंग्स हैं जिनमें माइक्रोचिप्स, टेलीफोन के पुर्जे बेचने वाली हजारों दुकानें हैं। कोरोना के डर से लोगों को वर्क फ्रॉम दे दिया गया है। फिलहाल ये सभी 2 सितंबर तक बंद रहेंगे। इस बंद से दुनिया भर में सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ने की बात कही जा रही है।

11 लोगों की रिपोर्ट आई पॉजिटिव

हुआकियांगबेई वह जगह है जहां से दुनिया भर में इलेक्ट्रानिक सामानों को भेजा जाता है। प्रभावित इलाके में सभी दुकानों को बंद करा दिया गया है, केवल जरूरी बिजनेस जैसे सुपरमार्केट, रेस्टोरेंट और फार्मेसी को खोलने की इजाजत दी गई है। अधिकारियों ने कहा- रविवार को 1.8 करोड़ की आबादी वाले शेनझेन में 11 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसलिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

6 महीने बाद फिर से गहराया संकट

रिपोर्ट के अनुसार, रेस्टोरेंट से केवल खाना ले जाने की अनुमति होगी। इसके अलावा सभी सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया है। 17 मिलियन की जनता वाले शहर शेनझेन में इस साल मार्च में एक सप्ताह के भीतर कोरोना संक्रमण पर काबू कर लिया गया था। इसके बाद प्रशासन के कारगर मॉडल का स्वागत भी किया गया। लेकिन सोमवार को यहां कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने के बाद फिर से लॉकडाउन का कदम उठाया गया।

लगभग 500 लोग मिले थे संक्रमित

हाल ही में चीन में कोरोना का विस्फोट होने से हवाई सेवा और ट्रेन सर्विस को रोक दिया गया था। टूरिस्ट डेस्टिनेशन और चीन का हवाई कहे जाने वाले सान्या शहर में कोरोना के 483 मामले सामने आए थे। इसके बाद हवाई और रेल सेवा पर रोक लगा दी गई थी।

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