चीन के विशेष राजदूत ने जेपी सिंह से की मुलाकात, कहा, तालिबान में चीन भारत के बिना नहीं बढ़ सकता आगे

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अफगानिस्तान (Afghanistan) में चीन के विशेष राजदूत यूई जियाओयोंग (Yue Xiaoyong) एक बेहद लो प्रोफाइल दौरे पर गुरुवार को भारत में थे. इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव जेपी सिंह (Jp Singh) से मुलाकात कर अफगानिस्तान से जुड़े कई मसलों पर बातचीत की. कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यूई जियाओयोंग की यह यात्रा इस बात का पुख्ता संकेत है कि चीन (China) ने भी स्वीकार कर लिया है तालिबान शासित अफगानिस्तान में भारत के बगैर आगे नहीं बढ़ा जा सकता है. लगभग साल भर पहले अफगानिस्तान के लिए चीन की ओर से नियुक्त विशेष राजदूत यूई की यह पहली भारत (India) यात्रा थी. इसके पहले वह अफगान मसलों पर चर्चा के लिए पाकिस्तान (Pakistan) तुर्की (Turkiye) का दौरा कर चुके हैं. गलवान में जून 2020 में भारतीय-चीनी पीएलए (PLA) सैनिकों में हिंसक झड़प के बाद किसी चीनी अधिकारी का यह दूसरा बड़ा दौरा रहा. इसके पहले इसी साल मार्च में चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) भारत के दौरे पर आए थे.

यूई ने कहा सकारात्मक रही बातचीत
हालांकि यूई के नई दिल्ली दौरे संयुक्त सचिव जेपी सिंह से मुलाकात पर सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया. गौरतलब है कि जेपी सिंह विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान ईरान से जुड़े मसले देखते हैं. जेपी सिंह ने हाल ही में तालिबान के वरिष्ठ नेताओं कमांडरों से भी मुलाकात की थी. इस लिहाज से यूई का भारत दौरा इस बात का प्रतीक है कि अफगानिस्तान में भारत के सहयोग के बगैर मसलों को सुलझाया नहीं जा सकता है. इस बैठक के बाद यूई ने एक ट्वीट में कहा कि मुलाकात का उद्देश्य अफगानिस्तान में शांति स्थायित्व लाने के प्रयासों पर बातचीत थी. उन्होंने लिखा, ‘पहली बार भारत यात्रा अच्छी रही. संयुक्त सचिव जेपी सिंह से अफगानिस्तान से जुड़े विभिन्न मसलों पर बातचीत हुई. दोनों ही पक्ष अफगानिस्तान में शांति स्थायित्व के लिए सकारात्मक ऊर्जा के साथ परस्पर बातचीत बढ़ाने साथ काम करने के लिए राजी हैं. ‘ यूई का नई दिल्ली दौरा चीन-ताइवान में बढ़े तनाव के बीच में हुआ है. गौरतलब है कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे के बाद चीन ने ताइवान स्ट्रेट में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है.

चीन ने खुद की थी बातचीत की पेशकश
यूई के नई दिल्ली दौरे से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात की पेशकश चीन की ओर से की गई थी. इस लिहाज से कूटनीतिक स्तर पर यह साफ हो जाता है कि अफगानिस्तान में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को ड्रैगन ने भी स्वीकार कर लिया है. सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात को भारत-चीन रिश्तों के सामान्य होने के संकेत बतौर नहीं देखना चाहिए. खासकर लद्दाख में सैनिकों के जमावड़े को लेकर नई दिल्ली औऱ बीजिंग के बीच मतभेद अभी सुलझे नहीं हैं. पिछले साल अगस्त में दो दशकों बाद अफगानिस्तान पर तालिबान के दोबारा कब्जे के बाद भारत-चीन के वरिष्ठ कूटनीतिक अधिकारियों के बीच यह पहली मुलाकात थी. गौरतलब है कि चीन उन चंद देशों में शामिल है, जिसने तालिबान शासन के बावजूद काबुल में अपना दूतावास बंद नहीं किया था. हालांकि चीन ने भी अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है, लेकिन उसने ‘मित्रवत सहयोगपूर्ण रिश्तों’ की वकालत जरूर की है.

तुर्की पाकिस्तान भी गए यूई
यूई के नई दिल्ली प्रवास से पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी तालिबान के कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं. ऐसी चर्चा भी है कि कई चीनी कंपनियां अफगानिस्तान के खनिज संसाधनों का दोहन कर रही है. इस तरह की रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत ने जून में काबुल में अपने दूतावास में तकनीकी दल भेज उसे सांकेतिक रूप से फिर से शुरू कर दिया. बताते हैं कि यूई भारत यात्रा से पहले 1 अगस्त को तुर्की गए थे, जहां उन्होंने अफगानिस्तान मसले पर ही बातचीत की. इसके पहले 18 जुलाई को यूई ने पाकिस्तान का दौरा कर विदेश सचिव सोहेल महमूद से बातचीत की थी. इस मुलाकात के केंद्र में अफगानिस्तान समेत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी रहा. इस मुलाकात के बाद यूई ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण रचनात्मक भूमिका की सराहना भी की थी.

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